यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधान परिषद में सपा पर बोला हमला, महिला राज्यपाल का अपमान बताया
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को विधान परिषद में समाजवादी पार्टी (सपा) पर कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के नेताओं ने महिला राज्यपाल का अपमान किया है और उनके प्रति अनुचित व्यवहार किया गया।
सीएम योगी ने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण शासन की उपलब्धियों और भावी योजनाओं का दस्तावेज होता है। उन्होंने कहा, “राज्यपाल का अभिभाषण शासन की उपलब्धियों और भावी योजनाओं का एक दस्तावेज होता है। हमारे संवैधानिक प्रमुख के प्रति हमारे मुख्य प्रतिपक्षी का आचरण और व्यवहार बहुत ही अशोभनीय और दुर्भाग्यपूर्ण रहा है।”
सीएम ने अपने संबोधन में बताया कि विधान परिषद में महिला राज्यपाल के प्रति अनुशासनहीनता और असभ्य व्यवहार किसी भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों का सम्मान करना प्रत्येक राजनीतिक दल और नेता का दायित्व है, और ऐसे व्यवहार से लोकतंत्र की गरिमा पर सवाल उठते हैं।
सपा नेताओं के इस व्यवहार पर मुख्यमंत्री ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल एक राजनीतिक विरोधाभास नहीं है, बल्कि संवैधानिक मर्यादा और सम्मान के प्रति अपमानजनक रवैया है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के प्रति किसी भी प्रकार की अनादरपूर्ण हरकत लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं के लिए खतरनाक संदेश देती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह हमला विधानसभा और विधान परिषद में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सपा और भाजपा के बीच मौजूदा माहौल में छोटे-छोटे घटनाक्रम भी बड़े राजनीतिक बहस का रूप ले लेते हैं।
सीएम योगी ने अपने संबोधन में विपक्षी दलों से अपील की कि वे संवैधानिक पदों का सम्मान करें और राजनीतिक लड़ाई में मर्यादा का पालन करें। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जनता की भलाई और विकास योजनाओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है और किसी भी तरह के अवांछित विवाद को लोकतंत्र के मूल्यों के विपरीत नहीं होने दिया जाएगा।
सपा की ओर से अभी तक इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे आगामी चुनावी रणनीति और सत्ता-संवाद के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के विवादों में मीडिया और सोशल मीडिया पर टिप्पणियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में संवैधानिक मर्यादा और राजनीतिक आचरण के मुद्दे आम जनता के बीच अधिक चर्चा में आ जाते हैं।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह घटना विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बढ़ती राजनीतिक तीव्रता का संकेत है। सीएम योगी का यह हमला आगामी विधानसभा सत्र और चुनावी रणनीतियों पर भी असर डाल सकता है।

