मुरादाबाद के पीतल उद्योग पर अमेरिका-वेनेजुएला तनाव का असर, निर्यात संकट गहराया
उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद, जिसे देश में पीतल नगरी के रूप में जाना जाता है, अपने हस्तशिल्प और पीतल उत्पादों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है। यहां का हस्तशिल्प उद्योग न केवल भारत की पहचान है, बल्कि लाखों कारीगरों, श्रमिकों और छोटे उद्योगों की आजीविका का प्रमुख साधन भी है। लेकिन हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रम ने इस उद्योग को गंभीर संकट में डाल दिया है।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते राजनीतिक और सैन्य तनाव का सीधा असर मुरादाबाद के पीतल निर्यात पर पड़ा है। दोनों देशों में आर्थिक और सैन्य दबाव बढ़ने के कारण वेनेजुएला में अमेरिका से जुड़े व्यापारिक समझौते और आयात-निर्यात प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं। इसका प्रभाव मुरादाबाद के पीतल उत्पादों के निर्यात पर भी पड़ने लगा है, क्योंकि यह नगरी अमेरिका और वेनेजुएला जैसे देशों में अपने उत्पाद भेजती है।
निर्यातकों और कारीगरों पर असर
निर्यातक और उद्योगपति बताते हैं कि पिछले कुछ महीनों में आदेश में कटौती और भुगतान में देरी देखने को मिली है। कई निर्यातकों को ऑर्डर कैंसिलेशन और डिमांड में कमी का सामना करना पड़ा है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि इससे न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि लाखों कारीगरों और मजदूरों की रोज़गार सुरक्षा भी खतरे में है।
कारीगरों के अनुसार, मुरादाबाद में पीतल का उत्पादन पारंपरिक कलाकारी और हाथ से तैयार होने वाले उत्पादों पर निर्भर है। इसलिए निर्यात में कमी होने पर सीधे तौर पर उनके रोज़गार और आजीविका पर असर पड़ता है। कई छोटे उद्योगों को उत्पादन घटाने या कर्मचारियों की संख्या कम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
सरकार और उद्योग की प्रतिक्रिया
उद्योग जगत और कारीगर संघटन ने राज्य और केंद्र सरकार से अपील की है कि वे निर्यातकों को आर्थिक मदद, टैक्स छूट और नए अंतरराष्ट्रीय बाजार तलाशने में सहयोग प्रदान करें। विशेषज्ञों का मानना है कि मुरादाबाद के हस्तशिल्प उद्योग की स्थिरता और कारीगरों की आजीविका के लिए यह कदम जरूरी है।
राज्य सरकार ने भी संकेत दिया है कि वह पीतल उद्योग को बढ़ावा देने और नए निर्यात मार्ग खोलने के लिए नीति तैयार कर रही है। इसमें अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मेलों में सहभागिता, डिजिटल मार्केटिंग और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उत्पादों की बिक्री बढ़ाने जैसी पहल शामिल हैं।
भविष्य की दिशा
विशेषज्ञों का कहना है कि मुरादाबाद के उद्योग को केवल संकटों के चलते नहीं, बल्कि नई रणनीतियों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की विविधता के माध्यम से सुरक्षित किया जा सकता है। इसके लिए निर्यातकों, कारीगरों और सरकार के बीच सहयोग और साझा योजनाओं की आवश्यकता है।

