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बस्ती में एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर बवाल, दसिया गांव में विरोध तेज; सांसद-विधायक को पुलिस ने रास्ते में रोका

बस्ती में एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर बवाल, दसिया गांव में विरोध तेज; सांसद-विधायक को पुलिस ने रास्ते में रोका

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के दसिया गांव में प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर विरोध तेज हो गया है। मंगलवार को कई सामाजिक और किसान संगठनों ने फैक्ट्री के खिलाफ प्रदर्शन का ऐलान किया। प्रदर्शन में शामिल होने के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) के स्थानीय सांसद और विधायक भी रवाना हुए, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। इससे इलाके में राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया।

बताया जा रहा है कि एथेनॉल फैक्ट्री के निर्माण को लेकर ग्रामीणों के एक वर्ग में लंबे समय से नाराजगी है। उनका कहना है कि फैक्ट्री लगने से पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही खेती, जल स्रोतों और आसपास के गांवों के लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इसी को लेकर विभिन्न संगठनों ने मंगलवार को विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था।

प्रदर्शन को देखते हुए जिला प्रशासन पहले से ही सतर्क नजर आया। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई और कई प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई। इसी दौरान प्रदर्शन स्थल की ओर जा रहे सपा के स्थानीय सांसद और विधायक को पुलिस ने बीच रास्ते में रोक दिया। पुलिस अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी।

सपा नेताओं को रोके जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई। पार्टी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि जनता की आवाज उठाना जनप्रतिनिधियों का दायित्व है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने से रोकना उचित नहीं है।

वहीं प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। अधिकारियों के अनुसार, किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए हैं। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

फिलहाल दसिया गांव और आसपास के क्षेत्रों में तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रित माहौल बना हुआ है। प्रदर्शन को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है, जबकि ग्रामीण और विभिन्न संगठन अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों के बीच बातचीत होती है या आंदोलन और तेज होता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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