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यूपी में एक्सप्रेसवे विकास के बीच टोल दरों में बढ़ोतरी की तैयारी, यात्रियों पर बढ़ेगा बोझ

यूपी में एक्सप्रेसवे विकास के बीच टोल दरों में बढ़ोतरी की तैयारी, यात्रियों पर बढ़ेगा बोझ

उत्तर प्रदेश में तेजी से विकसित हो रहे एक्सप्रेसवे नेटवर्क के बीच अब आम यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की संभावना बढ़ गई है। हाल ही में गंगा एक्सप्रेसवे के शुभारंभ के साथ राज्य में सड़क अवसंरचना को नई गति मिली है, लेकिन इसी क्रम में एक प्रमुख हाईवे पर टोल दरों में बढ़ोतरी की तैयारी की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, संबंधित विभाग ने टोल शुल्क में संशोधन का प्रस्ताव तैयार कर मुख्यालय को भेज दिया है। जैसे ही इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी जाएंगी। इससे रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले हजारों वाहन चालकों को अधिक शुल्क चुकाना पड़ेगा।

बताया जा रहा है कि टोल दरों में बढ़ोतरी का निर्णय सड़क रखरखाव, सुरक्षा सुविधाओं में सुधार और संचालन लागत में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए लिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बेहतर सड़क गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और यातायात प्रबंधन के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता होती है, जिसके चलते यह कदम उठाया जा रहा है।

हालांकि, आम जनता और वाहन चालकों में इस संभावित बढ़ोतरी को लेकर चिंता देखी जा रही है। नियमित रूप से यात्रा करने वाले लोगों का कहना है कि पहले से ही ईंधन की कीमतें और अन्य खर्च बढ़ चुके हैं, ऐसे में टोल शुल्क में वृद्धि से उनकी जेब पर सीधा असर पड़ेगा। खासकर दैनिक आवागमन करने वाले नौकरीपेशा और छोटे व्यवसायियों के लिए यह एक अतिरिक्त बोझ साबित हो सकता है।

परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सप्रेसवे और हाईवे का विस्तार राज्य के विकास के लिए जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही टोल दरों को संतुलित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि दरें अत्यधिक बढ़ाई जाती हैं, तो इससे वैकल्पिक मार्गों पर दबाव बढ़ सकता है और ट्रैफिक प्रबंधन में नई चुनौतियां सामने आ सकती हैं।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े एक्सप्रेसवे परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जिनमें गंगा एक्सप्रेसवे प्रमुख है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य राज्य के विभिन्न हिस्सों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करना और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।

प्रशासन का कहना है कि टोल दरों में किसी भी बदलाव से पहले सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा और जनता के हितों का ध्यान रखा जाएगा। फिलहाल सभी की नजर मुख्यालय से मिलने वाली अंतिम मंजूरी पर टिकी है, जिसके बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

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