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यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने विवादित पोस्ट पर मांगी माफी, लिखा- आगे से भाषा शालीन रखेंगे

यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने विवादित पोस्ट पर मांगी माफी, लिखा- आगे से भाषा शालीन रखेंगे

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के आधिकारिक ‘X’ अकाउंट से की गई एक टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया। सोशल मीडिया पर आलोचना होने के बाद करीब 24 घंटे बाद 27 अक्टूबर को आयोग के आधिकारिक हैंडल ने अपने बयान पर माफी मांग ली। कार्यालय ने स्वीकार किया कि पोस्ट की भाषा और तीखा लहजा आधिकारिक संवाद के अनुरूप नहीं था। साथ ही भविष्य में शालीन और औपचारिक भाषा का इस्तेमाल करने का भरोसा दिया।

क्या था विवादित पोस्ट में?

विवाद की शुरुआत उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में दर्ज कुछ अजीब नामों को लेकर हुई। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने मतदाता सूची में ‘राम ने यादव को मारा’ जैसी प्रविष्टि पर सवाल उठाए थे। उन्होंने पूछा था कि ऐसी गलतियां किस तरह हुईं और क्या मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में जातिगत भेदभाव हुआ है।

इसके जवाब में उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के आधिकारिक ‘X’ हैंडल से एक पोस्ट की गई। इसमें ‘राम ने शर्मा को मारा’ नाम की प्रविष्टि का उल्लेख करते हुए कहा गया कि कंप्यूटर या सॉफ्टवेयर जातिवादी नहीं होते। इसी पोस्ट में यह टिप्पणी भी की गई कि शुक्र है कि राम ने किसी अल्पसंख्यक को नहीं मारा, वरना जातिवादी होने के साथ-साथ सांप्रदायिक होने का आरोप भी लगता।

सोशल मीडिया पर हुई आलोचना

पोस्ट में अल्पसंख्यक समुदाय का संदर्भ आने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी भाषा को लेकर सवाल उठने लगे। विपक्षी नेताओं ने भी आधिकारिक अकाउंट से की गई टिप्पणी पर आपत्ति जताई। विवाद का मुख्य मुद्दा यह रहा कि एक संवैधानिक संस्था के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से इस तरह की व्यंग्यात्मक भाषा का इस्तेमाल कितना उचित है।

माफी में क्या कहा गया?

27 अक्टूबर को जारी माफीनामे में आधिकारिक हैंडल ने कहा कि पिछली पोस्ट में टिप्पणियों की भाषा, भाव और तीखा स्वर उस अकाउंट से अपेक्षित संवाद के मानकों के अनुरूप नहीं थे। पोस्ट से नाराज और आहत लोगों की प्रतिक्रिया को स्वीकार करते हुए ईमानदारी से माफी मांगी गई। साथ ही कहा गया कि आगे से संवाद शालीन और औपचारिक रखा जाएगा।

इस पूरे मामले ने मतदाता सूची में दर्ज गलतियों के साथ-साथ सरकारी संस्थाओं के सोशल मीडिया संवाद की भाषा और जिम्मेदारी पर भी चर्चा छेड़ दी है। मतदाता सूची की त्रुटियों की जांच और उनके कारणों को स्पष्ट करना भी इस विवाद के व्यापक संदर्भ का हिस्सा है।

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