ईंधन बचाने की अनोखी पहल: लखनऊ में 70 जज साइकिल से पहुंचे कोर्ट, वीडियो में देंखे दूसरी ओर यूपी में पेट्रोल-डीजल संकट से हाहाकार
उत्तर प्रदेश में एक तरफ ईंधन बचाने को लेकर जागरूकता की अनोखी मिसाल देखने को मिली, तो दूसरी ओर कई जिलों में पेट्रोल-डीजल की किल्लत ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रधानमंत्री की ईंधन बचाने की अपील के बीच लखनऊ में शुक्रवार को एक प्रेरणादायक दृश्य सामने आया, जहां 70 जज एक साथ साइकिल चलाकर जिला न्यायालय पहुंचे।
लखनऊ में आयोजित इस पहल ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। सभी जजों ने अपनी साइकिलों पर एक विशेष संदेश वाले पंपलेट लगाए थे, जिन पर लिखा था— “एक देश, एक संकल्प: ईंधन बचाओ।” इस अभियान का उद्देश्य लोगों में ईंधन संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देना था। इस पहल को न्यायिक प्रशासन के स्तर पर एक सकारात्मक और प्रतीकात्मक कदम माना जा रहा है।
हालांकि, इसी बीच राज्य के कुछ जिलों में स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है। कुशीनगर और महाराजगंज में पिछले कई दिनों से पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत बनी हुई है। लगातार चौथे दिन भी पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें देखी गईं, जहां लोग घंटों इंतजार के बाद भी ईंधन नहीं प्राप्त कर पा रहे हैं।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई लोग बड़े डिब्बों और कंटेनरों के साथ पेट्रोल पंपों पर पहुंच रहे हैं ताकि जरूरत के अनुसार ईंधन जमा कर सकें। भीड़ और इंतजार ने आम जनजीवन को प्रभावित कर दिया है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां कृषि कार्य पूरी तरह से डीजल पर निर्भर है।महाराजगंज के एक स्थानीय युवक ने बताया कि वह सुबह से ही लाइन में खड़ा है, लेकिन अब तक उसे डीजल नहीं मिल सका। उसने चिंता जताते हुए कहा कि अगर समय पर डीजल उपलब्ध नहीं हुआ, तो खेतों में सिंचाई और अन्य कृषि कार्य कैसे पूरे होंगे। यह स्थिति किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
एक ओर जहां लखनऊ में साइकिलिंग के जरिए ईंधन बचाने का संदेश दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों में ईंधन की कमी लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। यह विरोधाभास राज्य में ईंधन आपूर्ति और मांग के बीच असंतुलन को भी उजागर करता है।प्रशासन की ओर से स्थिति को सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन फिलहाल लोगों को राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। आने वाले दिनों में हालात सुधरेंगे या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

