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मथुरा में छाता शुगर मिल आंदोलन उग्र, पुतला छीनने पर पुलिस-किसानों में धक्का-मुक्की; महिलाओं ने चप्पलें उठाईं

मथुरा में छाता शुगर मिल आंदोलन उग्र, पुतला छीनने पर पुलिस-किसानों में धक्का-मुक्की; महिलाओं ने चप्पलें उठाईं

छाता शुगर मिल को दोबारा शुरू कराने की मांग को लेकर चल रहा किसानों और पूर्व सैनिकों का आंदोलन मंगलवार को दशहरे के दिन उग्र हो गया। 69 दिन से धरना दे रहे प्रदर्शनकारियों ने जनप्रतिनिधियों के पुतले जलाकर विरोध जताने की कोशिश की। पुलिस ने पुतले छीनने का प्रयास किया, जिसके बाद मौके पर तनाव और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। महिलाओं ने भी विरोध जताया।

पुतले छीनने पर बढ़ा विवाद

आंदोलनकारियों ने विजयादशमी पर गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री, सांसद और क्षेत्र के विधायकों के पुतले जलाने की घोषणा की थी। इसे देखते हुए मंगलवार सुबह से ही धरनास्थल पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया था।

शाम करीब चार बजे प्रदर्शनकारी जनप्रतिनिधियों के मुखौटे लगे पुतले लेकर दहन के लिए आगे बढ़े। इसी दौरान पुलिस ने पुतले अपने कब्जे में लेने की कोशिश की। इस पर प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। मौके पर मौजूद महिलाओं ने भी विरोध किया। कुछ महिलाओं के पुलिसकर्मियों पर चप्पल चलाने की कोशिश करने की खबर सामने आई।

18 साल से बंद है छाता शुगर मिल

छाता की चीनी मिल करीब 18 साल से बंद पड़ी है। इसे दोबारा चालू कराने के लिए किसान और पूर्व सैनिक लंबे समय से मांग उठा रहे हैं। आंदोलन 13 अगस्त से मिल परिसर के सामने जारी है।

सरकार ने मिल को तीन चरणों में शुरू करने की योजना को मंजूरी दी है। पहले चरण में एथेनॉल प्लांट लगाने की बात कही गई है। हालांकि, आंदोलनकारियों की मांग है कि सबसे पहले चीनी का उत्पादन शुरू किया जाए। उनका कहना है कि क्षेत्र के किसानों को गन्ने की फसल का लाभ तभी मिलेगा, जब चीनी मिल दोबारा संचालित होगी।

अधिकारियों ने समझाकर शांत कराया

घटना के बाद प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखने की अपील की। आंदोलन के मुख्य संचालक पूर्व सूबेदार ललित कर्मयोगी ने पुतला दहन का कार्यक्रम स्थगित करने की बात कही।

हालांकि, खबरों के मुताबिक धरनास्थल से दूर एक खेत में जनप्रतिनिधियों के मुखौटे वाला पुतला जलाए जाने का दावा भी किया गया। इस घटनाक्रम के बाद छाता शुगर मिल को फिर से शुरू कराने की मांग एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

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