महिला की अंतिम यात्रा में साथ चले दो पालतू हाथी: संभल में 12 गांव से डेढ़ हजार लोग पहुंचे, बेटा बोला- दोनों गुमसुम हैं
उत्तर प्रदेश के संभल में एक महिला की अंतिम यात्रा ऐसी रही, जिसे देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। 74 वर्षीय रामबेटी देवी की मौत के बाद उनकी अंतिम यात्रा में उनके दो पालतू हाथी परमा और मोहन भी शामिल हुए। दोनों हाथी अपनी मालकिन की अर्थी के पीछे-पीछे चलते रहे। इस दौरान करीब 12 गांवों से लगभग डेढ़ हजार लोग अंतिम यात्रा में पहुंचे। इंसान और हाथियों के बीच वर्षों से बने इस रिश्ते ने पूरे इलाके को भावुक कर दिया।
अर्थी के पीछे चलते रहे परमा और मोहन
रामबेटी देवी के निधन की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। अंतिम यात्रा जब घर से निकली तो उनके दोनों पालतू हाथी भी साथ हो लिए। परमा और मोहन को अपनी मालकिन से इतना लगाव था कि वे काफी देर तक अर्थी के पीछे चलते रहे।
दोनों हाथियों को रामबेटी देवी के परिवार का हिस्सा माना जाता था। उनके साथ रहने के दौरान हाथियों और परिवार के बीच गहरा लगाव बन गया था। अंतिम यात्रा में हाथियों का इस तरह शामिल होना लोगों के लिए भी बेहद भावुक पल था।
12 गांवों से पहुंचे करीब 1500 लोग
रामबेटी देवी की अंतिम यात्रा में आसपास के करीब 12 गांवों के लोग शामिल हुए। बताया गया कि करीब डेढ़ हजार लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे। रास्ते में जहां भी लोगों की नजर दोनों हाथियों पर पड़ी, वहां लोग रुककर इस भावुक दृश्य को देखते रहे।
लोगों के बीच चर्चा रही कि आमतौर पर हाथियों को लेकर उनकी ताकत और विशाल आकार की बात होती है, लेकिन इस घटना में उनके भावनात्मक लगाव ने सभी का ध्यान खींचा।
बेटा बोला- मां के जाने के बाद दोनों गुमसुम हैं
रामबेटी देवी के बेटे ने बताया कि मां के निधन के बाद दोनों हाथियों के व्यवहार में बदलाव नजर आ रहा है। उसके मुताबिक परमा और मोहन गुमसुम हैं। वे पहले की तरह सामान्य नहीं दिख रहे और अपनी मालकिन की कमी महसूस कर रहे हैं।
परिवार के लिए भी दोनों हाथी सिर्फ पालतू जानवर नहीं थे। रामबेटी देवी के साथ लंबे समय से उनका जुड़ाव था। यही वजह रही कि अंतिम यात्रा में उन्हें रोकने के बजाय परिवार ने उन्हें मां को अंतिम विदाई देने दी।
इंसान और हाथियों के रिश्ते की मिसाल
रामबेटी देवी की अंतिम यात्रा में परमा और मोहन की मौजूदगी ने इंसान और जानवरों के बीच भावनात्मक रिश्ते की एक अलग तस्वीर सामने रखी। अंतिम यात्रा में मौजूद लोगों के लिए यह दृश्य लंबे समय तक याद रहने वाला बन गया।
दोनों हाथियों का अपनी मालकिन की अर्थी के पीछे चलना और फिर उनके निधन के बाद गुमसुम रहना इस बात की ओर इशारा करता है कि जानवर भी अपने करीबियों के बिछड़ने का असर महसूस कर सकते हैं। संभल की यह अंतिम यात्रा अब इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।

