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बिजनौर में साइबर ठगी से परेशान महिला ने की आत्महत्या, ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी से थी दहशत में

बिजनौर में साइबर ठगी से परेशान महिला ने की आत्महत्या, ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी से थी दहशत में

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां साइबर ठगों की लगातार धमकियों से परेशान होकर एक महिला ने आत्महत्या कर ली। इस घटना ने एक बार फिर देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों और उनकी भयावहता को उजागर कर दिया है।

पुलिस के अनुसार, मृतक महिला को कुछ दिनों से अज्ञात कॉल्स आ रही थीं। कॉल करने वाले खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर महिला को ‘डिजिटल अरेस्ट’ करने और जेल भेजने की धमकी दे रहे थे। ठगों ने महिला को यह भी विश्वास दिलाया कि वह किसी गंभीर आपराधिक मामले में फंस चुकी है और यदि उसने उनकी बात नहीं मानी तो तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

बताया जा रहा है कि ठगों ने महिला पर मानसिक दबाव बनाने के लिए लगातार कॉल और मैसेज किए। इस दौरान उन्होंने महिला को डराने के लिए फर्जी दस्तावेज और कानूनी कार्रवाई की बात भी कही। धीरे-धीरे महिला इस जाल में फंसती चली गई और डर के कारण उसने यह बात परिवार के अन्य सदस्यों से भी साझा नहीं की।

परिजनों का कहना है कि महिला पिछले कुछ दिनों से बेहद तनाव में थी और अक्सर फोन पर बात करने के बाद घबराई हुई नजर आती थी। हालांकि, उसने अपनी परेशानी का खुलकर जिक्र नहीं किया। अंततः मानसिक दबाव इतना बढ़ गया कि महिला ने आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठा लिया।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। मामले की जांच शुरू कर दी गई है और पुलिस साइबर सेल की मदद से उन नंबरों की पहचान करने की कोशिश कर रही है, जिनसे महिला को कॉल किए जा रहे थे।

विशेषज्ञों का कहना है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर ठग आम लोगों में भय पैदा करते हैं, जबकि वास्तविकता में ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं होता। पुलिस और जांच एजेंसियां कभी भी फोन पर इस तरह से किसी को गिरफ्तार करने की प्रक्रिया नहीं अपनातीं।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे इस तरह के कॉल्स से सावधान रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस को दें। साथ ही, ऐसे मामलों में घबराने के बजाय परिवार और नजदीकी लोगों से बात करना बेहद जरूरी है।

यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि साइबर अपराधी अब केवल आर्थिक ठगी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मानसिक रूप से भी लोगों को निशाना बना रहे हैं, जिसके परिणाम बेहद दुखद हो सकते हैं।

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