उत्तर प्रदेश में पर्यटन विभाग का पहल, प्लास्टिक मुक्त पर्यटन को बढ़ावा देने की तैयारी
उत्तर प्रदेश का पर्यटन विभाग राज्य को प्लास्टिक मुक्त पर्यटन स्थलों की दिशा में ले जाने के लिए सक्रिय हो गया है। विभाग ने प्रमुख पर्यटन स्थलों पर विशेष प्लास्टिक मुक्त मेलों और जागरूकता अभियानों की श्रृंखला शुरू करने की योजना बनाई है। इसके तहत जिला प्रशासन और स्थानीय संस्थाओं के सहयोग से पर्यटकों और व्यापारियों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जाएगा।
पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राज्य सरकार का लक्ष्य है कि उत्तर प्रदेश के धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों पर आने वाले लाखों पर्यटकों को स्वच्छ और हरित वातावरण मिले। इसके लिए “प्लास्टिक फ्री टूरिज़्म” को एक जन आंदोलन का स्वरूप दिया जाएगा।
विंध्याचल धाम का सफल प्रयोग
विभाग ने जानकारी दी कि विंध्याचल धाम में प्लास्टिक मुक्त पहल को सफलतापूर्वक लागू किया गया था, जिससे वहां स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला। इसी प्रयोग के आधार पर अब अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी इसी मॉडल को लागू करने की योजना है।
विशेष रूप से विंध्याचल में एक प्लास्टिक मैनेजमेंट यूनिट स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। इस यूनिट का मुख्य उद्देश्य होगा कि प्रयुक्त प्लास्टिक को एकत्र कर उसका वैज्ञानिक ढंग से पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) किया जाए, ताकि प्लास्टिक कचरा पर्यावरण को नुकसान न पहुंचा सके।
जागरूकता अभियान और मेले
पर्यटन विभाग का कहना है कि जागरूकता के बिना यह अभियान सफल नहीं हो सकता। इसलिए पर्यटन स्थलों पर प्लास्टिक मुक्त मेले और कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जिनमें पर्यटकों को कपड़े और जूट के थैले इस्तेमाल करने, सिंगल-यूज़ प्लास्टिक से बचने और स्थानीय स्तर पर पर्यावरण अनुकूल उत्पाद अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
इन मेलों में न केवल स्थानीय व्यापारियों और हस्तशिल्पियों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पर्यावरण हितैषी विकल्पों के लिए बाजार भी तैयार होगा। विभाग का मानना है कि इससे पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण दोनों को समान रूप से लाभ मिलेगा।
जिला प्रशासन का सहयोग
सरकार ने जिला प्रशासन को भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी का निर्देश दिया है। प्रत्येक जिले में पर्यटन स्थलों के आसपास साफ-सफाई के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे। साथ ही, पॉलिथीन और अन्य प्लास्टिक उत्पादों की बिक्री पर निगरानी रखी जाएगी।
पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन का संतुलन
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि प्लास्टिक प्रदूषण न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है बल्कि यह पर्यटन स्थलों की छवि को भी प्रभावित करता है। स्वच्छ और प्लास्टिक मुक्त पर्यटन स्थल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक आकर्षक माने जाते हैं। इसलिए यह पहल उत्तर प्रदेश के पर्यटन विकास में नई ऊर्जा भर सकती है।
जनसहभागिता होगी सबसे अहम
पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान की सफलता जनसहभागिता पर निर्भर करेगी। जब तक स्थानीय लोग, व्यापारी और पर्यटक खुद इसमें सक्रिय सहयोग नहीं देंगे, तब तक प्लास्टिक मुक्त पर्यटन का सपना अधूरा रहेगा।
कार्यक्रम के अंतर्गत विभाग ने यह भी घोषणा की है कि आने वाले महीनों में मथुरा, वाराणसी, अयोध्या, प्रयागराज और काशी जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों पर भी इस अभियान को लागू किया जाएगा।

