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गंगा एक्सप्रेसवे शुरू होते ही टोल दरें तय: मेरठ से प्रयागराज सफर महंगा, लेकिन समय में बड़ी बचत

गंगा एक्सप्रेसवे शुरू होते ही टोल दरें तय: मेरठ से प्रयागराज सफर महंगा, लेकिन समय में बड़ी बचत

उत्तर प्रदेश के बहुप्रतीक्षित 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे पर बुधवार से आवागमन शुरू होने के साथ ही टोल दरों की घोषणा कर दी गई है। इस नई एक्सप्रेसवे सुविधा से जहां यात्रियों को तेज और सुगम यात्रा का लाभ मिलेगा, वहीं सफर अब पहले की तुलना में अधिक महंगा हो गया है।

जानकारी के अनुसार, मेरठ से प्रयागराज तक के इस पूरे मार्ग पर कार के लिए एक तरफ का टोल लगभग ₹1800 तय किया गया है। वहीं बसों को इस मार्ग पर एक तरफ की यात्रा के लिए करीब ₹5720 टोल शुल्क देना होगा। भारी वाहनों और ट्रकों के लिए भी अलग-अलग श्रेणी के अनुसार टोल दरें निर्धारित की गई हैं।

हालांकि टोल दरें अधिक होने के बावजूद इस एक्सप्रेसवे को यात्रा समय में बड़ी राहत देने वाला माना जा रहा है। पहले जहां मेरठ से प्रयागराज तक का सफर लगभग 11 से 12 घंटे या उससे अधिक समय लेता था, वहीं अब यह दूरी महज 6 से 7 घंटे में पूरी की जा सकेगी।

अधिकारियों के मुताबिक, गंगा एक्सप्रेसवे का उद्देश्य न केवल पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश को बेहतर कनेक्टिविटी देना है, बल्कि औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को भी गति देना है। इससे माल ढुलाई और यात्रियों दोनों को समय की बड़ी बचत होगी।

इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से व्यापार, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, टोल दरों को लेकर आम यात्रियों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे समय की बचत के लिहाज से उचित बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे महंगा करार दे रहे हैं।

परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक एक्सप्रेसवे परियोजनाओं में टोल शुल्क आमतौर पर अधिक होता है, क्योंकि इनके रखरखाव और संचालन की लागत भी ज्यादा होती है। लेकिन बेहतर सड़क, कम ट्रैफिक और तेज यात्रा समय इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं।

कुल मिलाकर, गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के परिवहन ढांचे में एक बड़ा बदलाव लेकर आया है, जहां यात्रियों को सुविधा और गति तो मिलेगी, लेकिन इसके लिए उन्हें अधिक खर्च भी वहन करना होगा।

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