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घाटमपुर में दो बच्चों की दर्दनाक मौत, मां की नासमझी और सुरक्षा की कमी बनी वजह

घाटमपुर में दो बच्चों की दर्दनाक मौत, मां की नासमझी और सुरक्षा की कमी बनी वजह

बिहार के घाटमपुर क्षेत्र से दो अलग-अलग और दिल दहला देने वाली खबरें सामने आई हैं। इटर्रा गांव में एक छह माह के बच्चे की नासमझी और लापरवाही के कारण मौत हो गई, जबकि मूसानगर रोड पर एक पाँच वर्षीय बच्चे की गड्ढे में डूबकर दुखद मौत हुई।

इटर्रा गांव की घटना में, स्थानीय लोगों ने बताया कि बच्चे की मां ने मच्छर और मक्खियों से बचाने के लिए बच्चे के चेहरे पर दुपट्टा ओढ़ा। दुर्भाग्यवश यह दुपट्टा बच्चे के मुंह में चला गया और बच्चे की दम घुटने से मौत हो गई। परिवार के सदस्यों ने इस घटना के बाद पोस्टमार्टम नहीं कराया, जिससे मामले को लेकर प्रशासन और समाज में चिंता बढ़ गई है।

दूसरी दुखद घटना मूसानगर रोड पर हुई, जहां एक ईंट-भट्ठे में बने पानी भरे गड्ढे में पांच वर्षीय बच्चा डूब गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि बच्चा खेलने के दौरान गड्ढे में गिर गया और डूबने के कारण उसकी मौत हो गई। यह घटना इलाके में सुरक्षा और बच्चों की निगरानी की कमी की ओर ध्यान खींचती है।

स्थानीय प्रशासन ने दोनों घटनाओं की जानकारी मिलने के बाद बताया कि मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऐसे हादसों को रोकने के लिए सावधानी और जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।

विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों के साथ हमेशा सतर्क रहना चाहिए। मच्छर और मक्खियों से बचाने के उपाय करते समय बच्चों की सुरक्षा और सांस लेने की स्वतंत्रता सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में खुले गड्ढे और पानी जमा होने वाले स्थानों को ढकने और बच्चों से दूर रखने की जरूरत है।

स्थानीय लोग भी इस घटना को लेकर गहरी चिंता व्यक्त कर रहे हैं। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा में लापरवाही से ऐसे हादसे होते हैं, जिन्हें रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता और प्रशासनिक निगरानी जरूरी है।

घाटमपुर के इन दुखद मामलों ने स्पष्ट किया है कि छोटे बच्चों के जीवन की सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए। चाहे वह घर के अंदर हो या बाहर, बच्चों की निगरानी और सुरक्षा उपायों को गंभीरता से अपनाना आवश्यक है।

अंततः, इटर्रा गांव और मूसानगर रोड की यह घटनाएं केवल व्यक्तिगत त्रासदियां नहीं हैं, बल्कि यह समाज और प्रशासन के लिए सुरक्षा और जागरूकता का संदेश भी हैं। स्थानीय प्रशासन और ग्रामीण समुदाय को मिलकर ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे।

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