Samachar Nama
×

UP की ‘लेडी सिंघम’ IPS अंशिका वर्मा की कहानी: बिना कोचिंग सेल्फ स्टडी से हासिल की 136वीं ऑल इंडिया रैंक, पुलिस सेवा में बनाई अलग पहचान

UP की ‘लेडी सिंघम’ IPS अंशिका वर्मा की कहानी: बिना कोचिंग सेल्फ स्टडी से हासिल की 136वीं ऑल इंडिया रैंक, पुलिस सेवा में बनाई अलग पहचान

उत्तर प्रदेश की महिला आईपीएस अधिकारी अंशिका वर्मा अपनी कार्यशैली और पुलिस सेवा में सक्रिय भूमिका को लेकर चर्चा में रहती हैं। उन्हें सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स में ‘लेडी सिंघम’ के नाम से भी पहचाना जाता है। उनकी सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद सिविल सेवा परीक्षा पास करने का सपना देखते हैं। अंशिका ने महंगी कोचिंग का सहारा लेने के बजाय सेल्फ स्टडी पर भरोसा किया और यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 136 हासिल की।

इंजीनियरिंग के बाद चुनी सिविल सेवा की राह

अंशिका वर्मा ने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा में जाने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू की और अपनी पढ़ाई की रणनीति पर विशेष ध्यान दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अंशिका मूल रूप से प्रयागराज की रहने वाली हैं। उन्होंने नोएडा के गलगोटिया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी से बीटेक किया। इसके बाद उन्होंने प्रयागराज में रहकर यूपीएससी की तैयारी की। उनकी सफलता की खास बात यह रही कि उन्होंने किसी कोचिंग संस्थान में दाखिला लेने के बजाय खुद पढ़ाई करने पर भरोसा किया।

दूसरे प्रयास में हासिल की 136वीं रैंक

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में गिनी जाती है। इसमें सफलता के लिए लंबे समय तक नियमित अध्ययन, विषयों की समझ और परीक्षा के अनुरूप तैयारी जरूरी होती है। अंशिका वर्मा को भी अपने पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

उन्होंने अपनी तैयारी की रणनीति में सुधार किया और दूसरे प्रयास में परीक्षा पास कर ली। साल 2020 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने 136वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की। इस उपलब्धि के बाद उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा यानी आईपीएस के लिए हुआ। उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर आवंटित किया गया।

पुलिस सेवा में बनाई पहचान

आईपीएस बनने के बाद अंशिका वर्मा ने अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं। उनकी शुरुआती तैनाती आगरा के फतेहपुर सीकरी में थाना प्रभारी के रूप में रही। इसके बाद उन्होंने गोरखपुर में सहायक पुलिस अधीक्षक के तौर पर भी काम किया। बाद में उन्हें बरेली में तैनाती मिली।

पुलिस अधिकारी के रूप में उनकी पहचान कानून-व्यवस्था से जुड़े कार्यों और पुलिसिंग में सक्रिय भूमिका के कारण बनी। मीडिया रिपोर्ट्स में उन्हें ‘लेडी सिंघम’ कहकर संबोधित किया जाता है। हालांकि, अपराधियों में उनके नाम का कितना भय है, यह अलग-अलग मामलों और परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

युवाओं के लिए क्या है सीख?

अंशिका वर्मा की यात्रा बताती है कि किसी बड़े लक्ष्य को पाने के लिए केवल महंगी कोचिंग ही एकमात्र रास्ता नहीं है। सही अध्ययन सामग्री, नियमित अभ्यास, आत्मअनुशासन और कमजोरियों को पहचानकर उन पर काम करना भी तैयारी का अहम हिस्सा है।

यूपीएससी की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए उनकी सफलता एक उदाहरण है कि असफलता के बाद प्रयास जारी रखना कितना महत्वपूर्ण है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई से आईपीएस तक का उनका सफर यह संदेश देता है कि स्पष्ट लक्ष्य और लगातार मेहनत के साथ कठिन प्रतियोगी परीक्षा में सफलता पाने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

Share this story

Tags