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यूपी चुनाव से पहले वादों की रेस तेज, महिलाओं को लेकर BJP की तैयारी पर अखिलेश का पलटवार

यूपी चुनाव से पहले वादों की रेस तेज, महिलाओं को लेकर BJP की तैयारी पर अखिलेश का पलटवार

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच राजनीतिक दलों ने अभी से मतदाताओं को साधने की कवायद तेज कर दी है। खासकर महिलाओं को लेकर सियासी मुकाबला दिलचस्प होता दिखाई दे रहा है। एक ओर योगी आदित्यनाथ सरकार की ओर से बिहार की तर्ज पर महिलाओं के लिए बड़ी आर्थिक सहायता वाली योजना पर विचार किए जाने की खबरें सामने आई हैं, वहीं समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी महिलाओं के लिए बड़ा चुनावी वादा कर चुके हैं।

महिलाओं पर फोकस, BJP की तैयारी

रिपोर्टों के मुताबिक यूपी में बीजेपी सरकार महिलाओं के लिए करीब 50 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता वाली योजना पर विचार कर रही है। यह चर्चा ऐसे समय में सामने आई है जब 2027 का विधानसभा चुनाव धीरे-धीरे राजनीतिक दलों के एजेंडे के केंद्र में आ रहा है।

बिहार में महिलाओं को आर्थिक सहायता देने वाली योजनाओं को लेकर जिस तरह राजनीतिक चर्चा हुई, उसके बाद उत्तर प्रदेश में भी महिलाओं के बीच अपना आधार मजबूत करने के लिए ऐसी घोषणा की संभावना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अखिलेश ने भी दिया बड़ा ऑफर

वहीं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव महिलाओं के लिए पहले ही बड़ा चुनावी वादा कर चुके हैं। उन्होंने कहा है कि यदि समाजवादी पार्टी 2027 में सत्ता में आती है तो गरीब और वंचित महिलाओं को हर साल 40 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। साथ ही समाजवादी पेंशन योजना को दोबारा शुरू करने की बात भी कही गई है।

अखिलेश के इस ऐलान को बीजेपी के खिलाफ सीधे राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसे में अगर सरकार की ओर से भी महिलाओं के लिए बड़ी आर्थिक सहायता की घोषणा होती है तो चुनावी राजनीति में दोनों दलों के बीच वादों की प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।

2027 का मुकाबला क्यों है अहम?

उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है। राज्य की विधानसभा में 403 सीटें हैं और यूपी की राजनीति का राष्ट्रीय राजनीति पर भी बड़ा प्रभाव रहता है। 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रदर्शन में बड़ा सुधार हुआ था, जबकि बीजेपी को पहले के मुकाबले नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमे 2027 के लिए अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं।

बीजेपी के सामने अपने पुराने सामाजिक समीकरण को मजबूत करने की चुनौती है, जबकि अखिलेश यादव की रणनीति में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक यानी PDA के साथ महिलाओं और अन्य सामाजिक वर्गों को जोड़ने पर जोर दिखाई दे रहा है।

अब और तेज हो सकती है चुनावी घोषणाओं की होड़

महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता के वादे के बाद आने वाले महीनों में रोजगार, किसानों, युवाओं, गरीब परिवारों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी चुनावी राजनीति के केंद्र में आ सकते हैं।

फिलहाल यूपी में चुनावी मुकाबला शुरुआती दौर में है, लेकिन BJP और समाजवादी पार्टी के बीच वादों की सियासी होड़ ने संकेत दे दिया है कि 2027 का चुनाव सिर्फ संगठन और जातीय समीकरणों का नहीं, बल्कि कल्याणकारी योजनाओं और सीधे आर्थिक लाभ के वादों का भी बड़ा मुकाबला हो सकता है।

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