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फर्रुखाबाद में गंगा का बढ़ता कहर, दौली की मड़ैया की ओर बढ़ रही नदी; खेतों में खड़ी फसलें समा रहीं

फर्रुखाबाद में गंगा का बढ़ता कहर, दौली की मड़ैया की ओर बढ़ रही नदी; खेतों में खड़ी फसलें समा रहीं

फर्रुखाबाद में गंगा नदी का कटान लगातार बढ़ता जा रहा है। अब नदी का रुख सदर तहसील क्षेत्र के दौली की मड़ैया की ओर हो गया है। बुधवार सुबह तेज कटान के चलते एक और मकान गंगा में समा गया। वहीं समैचीपुर चितार और कटरी तौफीक क्षेत्र में नदी खेतों को तेजी से काट रही है। कई बीघा जमीन और खेतों में खड़ी फसलें नदी की धार में समा चुकी हैं।

गंगा के लगातार बढ़ते कटान से तटीय इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। स्थिति यह है कि ग्रामीण अपने मकानों को खुद तोड़कर जरूरी सामान और निर्माण सामग्री सुरक्षित स्थानों पर ले जाने में जुटे हैं।

एक और मकान गंगा में समाया

दौली की मड़ैया में गंगा का कटान तेजी से गांव की ओर बढ़ रहा है। इससे पहले 14 अगस्त को अंतराम, नंदराम समेत तीन भाइयों के मकान नदी में समा गए थे। स्वर्गीय रामरहीस के मकान का कुछ हिस्सा बचा हुआ था, लेकिन बुधवार सुबह तेज कटान में पूरा मकान भी गंगा की धार में समा गया।

ग्रामीणों के मुताबिक, जलस्तर फिलहाल स्थिर है, लेकिन जब गंगा कटान करती है तो कुछ ही घंटों में नदी की धार चार से पांच मीटर तक गांव की ओर बढ़ जाती है। इसी वजह से घरों में रह रहे लोगों की चिंता लगातार बढ़ रही है।

खेतों पर भी मंडराया संकट

गंगा का कटान अब मकानों के साथ-साथ खेतों को भी अपनी चपेट में ले रहा है। शमसाबाद क्षेत्र के समैचीपुर गांव के पास कई दिनों से नदी खाली जमीन और झोपड़ियों को काट रही है। कटरी तौफीक में अब खेतों में खड़ी फसलें नदी में समाने लगी हैं।

बुधवार को सुंदरलाल की करीब पांच बीघा गन्ने की फसल कटान की भेंट चढ़ गई। इसके अलावा राहुल की करीब चार बीघा, जोतराम की तीन बीघा और अनिल की करीब पांच बीघा जमीन भी कटान की चपेट में बताई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार अब तक करीब 10 किसानों की जमीन नदी में कट चुकी है।

ग्रामीणों में बढ़ी दहशत

लगातार जमीन कटने और मकानों के नदी में समाने से ग्रामीणों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। लोग अपने घरों से जरूरी सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। कई ग्रामीण मकानों को खुद तोड़ने में जुटे हैं, ताकि कम से कम ईंट और अन्य निर्माण सामग्री को बचाया जा सके।

फर्रुखाबाद के तटीय इलाकों में पहले भी गंगा के कटान से कई घर और रास्ते प्रभावित हो चुके हैं। प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और राहत कार्य किए जा रहे हैं। पिछले सप्ताह प्रभारी मंत्री ने भी दौली की मड़ैया पहुंचकर बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों से बातचीत की थी और राहत कार्य जारी रखने के निर्देश दिए थे।

फिलहाल गंगा का कटान ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है। मकानों के बाद अब खेत और फसलें नदी में समाने से किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों की नजर प्रशासन की राहत और बचाव व्यवस्था के साथ नदी के जलस्तर पर भी बनी हुई है।

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