धनतेरस से शुरू होगा दीपावली का पांच दिवसीय पर्व, शुक्र प्रदोष और हस्त नक्षत्र का बन रहा विशेष संयोग
दीपावली का पांच दिवसीय पर्व 6 नवंबर, शुक्रवार को धनतेरस के साथ शुरू होगा। इस बार धनतेरस पर शुक्र प्रदोष और हस्त नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यह संयोग खरीदारी और मां लक्ष्मी की पूजा के लिए खास माना जा रहा है। धनतेरस के दिन सोना-चांदी, बर्तन और अन्य घरेलू सामान खरीदने की परंपरा है।
ज्योतिष राहुल के अनुसार, शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। इस बार धनतेरस शुक्रवार को पड़ रही है और इसी दिन शुक्र प्रदोष का संयोग भी बन रहा है। ऐसे में धार्मिक दृष्टि से इस दिन का महत्व और बढ़ गया है। मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव और मां लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
हस्त नक्षत्र में खरीदारी का विशेष महत्व
धनतेरस पर हस्त नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, हस्त नक्षत्र में खरीदारी करना शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस नक्षत्र में खरीदी गई वस्तुओं से घर में धन-वैभव और समृद्धि आती है। यही वजह है कि धनतेरस के अवसर पर लोग सोने-चांदी के आभूषणों के साथ बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य उपयोगी वस्तुओं की खरीदारी करते हैं।
सुबह 10:30 बजे शुरू होगी त्रयोदशी तिथि
धनतेरस पर त्रयोदशी तिथि शुक्रवार सुबह 10:30 बजे से शुरू होगी। इसी तिथि के साथ पांच दिवसीय दीपावली पर्व का शुभारंभ होगा। धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करने की परंपरा है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है। इसलिए इस दिन स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के साथ पूजा-अर्चना की जाती है।
धनतेरस के साथ शुरू होने वाले पांच दिवसीय पर्व में धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज शामिल हैं। इस दौरान घरों में पूजा-पाठ, दीपदान और खरीदारी सहित कई धार्मिक परंपराएं निभाई जाती हैं।
धनतेरस पर शुक्र प्रदोष और हस्त नक्षत्र का संयोग होने से इस बार त्योहार को लेकर लोगों में विशेष उत्साह है।

