टफ्फू की मौत से टूट गया परिवार, तीन दिन घर में नहीं बना खाना; इंसानों की तरह की तेरहवीं, हवन के बाद बांटा प्रसाद
मेरठ में इंसान और पालतू जानवर के बीच रिश्ते की भावुक तस्वीर सामने आई है। यहां एक परिवार अपने पालतू कुत्ते टफ्फू की मौत से इतना दुखी हुआ कि लगातार तीन दिन तक घर में खाना नहीं बनाया। रविवार को परिवार ने टफ्फू की इंसानों की तरह तेरहवीं की रस्म भी निभाई। सुबह विधि-विधान से हवन कराया गया और इसके बाद रिश्तेदारों और पड़ोसियों को प्रसाद बांटा गया।
परिवार के लिए टफ्फू सिर्फ एक पालतू कुत्ता नहीं था, बल्कि घर के सदस्य जैसा था। लंबे समय से परिवार के साथ रहने के कारण टफ्फू से सभी का गहरा भावनात्मक जुड़ाव हो गया था। उसकी मौत के बाद परिवार में मातम जैसा माहौल रहा। परिजनों ने उसकी याद में तीन दिन तक घर में खाना तक नहीं बनाया।
रविवार को परिवार ने टफ्फू की तेरहवीं की रस्म आयोजित की। सुबह घर में हवन कराया गया। परिवार के सदस्यों ने पूजा-अर्चना कर टफ्फू को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद रिश्तेदारों और आसपास रहने वाले पड़ोसियों को प्रसाद वितरित किया गया। इस दौरान टफ्फू को याद करते हुए परिवार के सदस्य भावुक नजर आए।
परिजनों का कहना है कि टफ्फू ने परिवार के साथ कई साल बिताए और वह घर के हर सदस्य के बेहद करीब था। उसकी मौजूदगी परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी थी। ऐसे में उसकी मौत को स्वीकार करना उनके लिए आसान नहीं था। परिवार ने उसकी यादों को संजोकर रखने और अंतिम संस्कार की रस्में भी उसी भावनात्मक जुड़ाव के साथ निभाईं, जैसे किसी परिवार के सदस्य के जाने पर की जाती हैं।
टफ्फू की तेरहवीं में आसपास के लोग और परिवार के रिश्तेदार भी शामिल हुए। प्रसाद वितरण के दौरान लोगों ने परिवार को सांत्वना दी और टफ्फू को श्रद्धांजलि दी। यह आयोजन इलाके में चर्चा का विषय बन गया।
पालतू जानवरों को परिवार का सदस्य मानने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे परिवारों में कुत्ते, बिल्ली या अन्य पालतू जानवर केवल जानवर नहीं रहते, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाते हैं। उनके साथ लंबे समय तक रहने से भावनात्मक रिश्ता बन जाता है। यही वजह है कि उनके निधन के बाद परिवारों को गहरा दुख होता है।
मेरठ की यह घटना भी इंसान और पालतू जानवर के बीच इसी भावनात्मक रिश्ते को दिखाती है। परिवार ने टफ्फू की तेरहवीं कराकर उसे अंतिम विदाई दी और उसकी याद में रिश्तेदारों व पड़ोसियों के साथ प्रसाद साझा किया। टफ्फू अब परिवार के बीच नहीं है, लेकिन उसकी यादें परिजनों के लिए हमेशा बनी रहेंगी।

