AMU के पूर्व डीन की पत्नी का 2 महीने बाद कब्र से निकलवाया शव, पोस्टमार्टम में DNA सैंपल सुरक्षित; धीमा जहर देकर हत्या का आरोप
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के पूर्व डीन प्रोफेसर शब्बीर की पत्नी डॉ. नूर अफरोज की मौत के मामले में करीब दो महीने बाद कब्र से शव निकलवाकर पोस्टमार्टम कराया गया। शव काफी सड़-गल चुका था। डॉक्टरों ने जांच के लिए शव से डीएनए नमूना सुरक्षित किया है। मृतका के भतीजे ने धीमा जहर देकर हत्या किए जाने का आरोप लगाया था। इसी शिकायत के बाद शव को कब्र से बाहर निकलवाकर जांच कराने की कार्रवाई की गई।
दो महीने तक कब्र में रहने के कारण शव की स्थिति काफी खराब हो चुकी थी। ऐसे में पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टरों ने जरूरी नमूने एकत्र किए, ताकि मामले की जांच में वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जा सकें। अब डीएनए और अन्य जांच रिपोर्ट आने के बाद मौत से जुड़े सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है।
भतीजे ने लगाया था धीमा जहर देकर हत्या का आरोप
जानकारी के अनुसार, डॉ. नूर अफरोज की मौत के बाद उन्हें सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया था। बाद में उनके भतीजे ने मौत को सामान्य नहीं बताते हुए हत्या की आशंका जताई। भतीजे का आरोप था कि डॉ. नूर अफरोज को धीमा जहर देकर मारा गया है।
शिकायत में लगाए गए आरोपों के बाद मामले की जांच की मांग उठी। इसके बाद प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत कब्र से शव निकलवाने का फैसला लिया गया। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
शव सड़-गल चुका था, डॉक्टरों ने सुरक्षित किया DNA सैंपल
करीब दो महीने बाद शव कब्र से निकाले जाने के कारण काफी सड़-गल चुका था। इस स्थिति में पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने उपलब्ध परिस्थितियों के अनुसार जांच की और डीएनए नमूना सुरक्षित किया। वैज्ञानिक जांच के लिए नमूने को आगे भेजा जाएगा।
जांच एजेंसियां अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डीएनए जांच के नतीजों का इंतजार कर रही हैं। इन रिपोर्टों से मौत के कारणों की पड़ताल में मदद मिल सकती है।
जांच रिपोर्ट के बाद सामने आएगी मौत की वजह
फिलहाल डॉ. नूर अफरोज की मौत को लेकर लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। धीमा जहर देकर हत्या किए जाने का आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाया गया है। इसकी सच्चाई जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।
मामले में अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सुरक्षित किए गए डीएनए नमूने और अन्य साक्ष्य अहम माने जा रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि डॉ. नूर अफरोज की मौत किन परिस्थितियों में हुई थी और क्या इसमें किसी की आपराधिक भूमिका थी।

