इलाहाबाद हाईकोर्ट लखनऊ पीठ का बड़ा फैसला, दुष्कर्म केस में आजीवन कारावास काट रहे आरोपी बरी
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसले में दुष्कर्म और नाबालिग किशोरी की मौत के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आरोपी निर्मल कुमार को बरी कर दिया है। आरोपी पिछले 11 साल से अधिक समय से जेल में बंद था।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किसी भी आपराधिक मामले में केवल अनुमान, संदेह या परिस्थितिजन्य धारणाओं के आधार पर दोषसिद्धि नहीं की जा सकती। दोष साबित करने के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य का होना अनिवार्य है।
Lucknow: इस फैसले के बाद न्यायिक प्रक्रिया और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी चर्चा तेज हो गई है। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद बरी हुए आरोपी के मामले ने एक बार फिर न्याय प्रणाली में “संदेह के लाभ” के सिद्धांत को उजागर किया है।
फिलहाल इस निर्णय को कानूनी दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है, जिसमें अदालत ने सबूतों की मजबूती को ही निर्णायक आधार बताया है।

