उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक बड़े आतंकी साजिश का खुलासा हुआ है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। 23 अप्रैल को गिरफ्तार किए गए दो संदिग्ध आतंकियों से पूछताछ में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस साजिश के पीछे पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और आईएसआई के हैंडलर्स का हाथ बताया जा रहा है। आरोप है कि ये लोग भारत में हिंदूवादी नेताओं की टारगेट किलिंग और ग्रेनेड हमलों की योजना बना रहे थे।
पूछताछ में यह भी सामने आया है कि युवाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से कट्टरपंथी बनाने की कोशिश की जा रही थी। संदिग्धों ने कथित तौर पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए युवाओं को भड़काने और उन्हें आतंकी गतिविधियों में शामिल करने का प्रयास किया।
इस मामले की जांच उत्तर प्रदेश एटीएस (ATS) द्वारा की जा रही है। एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संभावित स्लीपर सेल्स की तलाश में जुटी हुई है।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह साजिश बड़े पैमाने पर हिंसा फैलाने की मंशा से रची गई थी। हालांकि, समय रहते गिरफ्तारी होने से एक बड़ा खतरा टल गया है।
एटीएस अधिकारियों का कहना है कि मामले में डिजिटल साक्ष्यों, कॉल डिटेल्स और सोशल मीडिया गतिविधियों की गहन जांच की जा रही है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन को भी खंगाला जा रहा है, ताकि पूरी साजिश का पर्दाफाश किया जा सके।
इस खुलासे के बाद नोएडा और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है और पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि आतंकी संगठन अब पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे सतर्कता और जागरूकता दोनों की जरूरत पहले से ज्यादा बढ़ गई है।

