लखनऊ में किसान पथ पर फॉर्मेलिन से भरा टैंकर पलटा, 2 किमी तक लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बख्शी का तालाब (बीकेटी) क्षेत्र में किसान पथ पर फॉर्मेलिन से भरा एक टैंकर पलट गया। हादसे के बाद आसपास के इलाके में केमिकल का असर महसूस किए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया गया कि करीब दो किलोमीटर के दायरे में लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी हुई। वहीं, लगभग पांच किलोमीटर तक फॉर्मेलिन का असर महसूस किए जाने की बात कही गई है। घटना के बाद क्षेत्र में लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई।
फॉर्मेलिन एक रासायनिक घोल है, जिसमें फॉर्मल्डिहाइड होता है। इसका इस्तेमाल कुछ औद्योगिक और प्रयोगशाला संबंधी कार्यों में किया जाता है। इसके संपर्क में आने या इसकी वाष्प सांस के जरिए शरीर में पहुंचने पर आंखों, नाक और गले में जलन हो सकती है। अधिक मात्रा में संपर्क होने पर सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है।
टैंकर पलटने से आसपास के इलाके में परेशानी
किसान पथ पर टैंकर पलटने के बाद आसपास के लोगों को परेशानी होने की सूचना मिली। आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण सामने आने से हादसे की गंभीरता को लेकर सवाल उठे हैं। केमिकल से भरे टैंकर की दुर्घटना में रिसाव होने पर हवा के साथ रासायनिक वाष्प आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच सकती है। हालांकि, रिसाव की मात्रा और केमिकल के फैलाव की वास्तविक सीमा की पुष्टि संबंधित अधिकारियों की जांच से ही हो सकेगी।
फॉर्मेलिन के संपर्क से स्वास्थ्य को खतरा
फॉर्मेलिन के संपर्क में आने पर आंखों में पानी आना, जलन, खांसी और गले में परेशानी जैसे लक्षण हो सकते हैं। संवेदनशील लोगों और पहले से सांस संबंधी समस्या से जूझ रहे व्यक्तियों को अधिक दिक्कत हो सकती है।
ऐसी स्थिति में लोगों को प्रभावित क्षेत्र से दूर रहना चाहिए। केमिकल की गंध महसूस होने या आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी होने पर सुरक्षित स्थान पर जाना जरूरी है। लक्षण बने रहने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। बिना सुरक्षा उपकरणों के किसी भी व्यक्ति को रिसाव वाले स्थान के पास नहीं जाना चाहिए।
प्रशासन के सामने सुरक्षा और नियंत्रण की चुनौती
रासायनिक पदार्थ से भरे टैंकर के पलटने पर सबसे जरूरी कदम रिसाव को नियंत्रित करना और लोगों को प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित दूरी पर रखना होता है। ऐसे मामलों में प्रशिक्षित राहत दल और संबंधित विभागों की मदद से स्थिति का आकलन किया जाता है।
फिलहाल, हादसे में टैंकर से हुए रिसाव की मात्रा, प्रभावित लोगों की संख्या और प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। इन जानकारियों के सामने आने के बाद घटना के पूरे प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।

