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जज तक पहुंच बनाने की कोशिश पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: कहा- न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा हमला, यह इतिहास का काला दिन

जज तक पहुंच बनाने की कोशिश पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: कहा- न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा हमला, यह इतिहास का काला दिन

न्यायपालिका की निष्पक्षता और स्वतंत्रता को लेकर एक गंभीर टिप्पणी सामने आई है। जमानत से जुड़े एक मामले में जज तक पहुंच बनाने की कथित कोशिश पर सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया कि इस तरह के प्रयास न्याय व्यवस्था की नींव को कमजोर करते हैं। ऐसे किसी भी प्रयास को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।कहा गया कि न्यायाधीशों पर किसी भी तरह का दबाव बनाना या फैसले को प्रभावित करने की कोशिश करना न्यायपालिका की गरिमा के खिलाफ है। इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सीधा हमला बताया गया।

न्यायिक व्यवस्था की गरिमा बनाए रखना जरूरी

मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा गया कि अदालतों में फैसले केवल कानून और तथ्यों के आधार पर होते हैं। किसी व्यक्ति, संस्था या माध्यम के जरिए न्यायाधीश तक पहुंच बनाने की कोशिश न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप के समान है।उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में जनता का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है। अगर इस तरह के प्रयास होते हैं तो इससे पूरी न्याय व्यवस्था की छवि प्रभावित होती है।

'ऐसे प्रयास स्वीकार नहीं किए जा सकते'

टिप्पणी में कहा गया कि जमानत हासिल करने के लिए जज को प्रभावित करने या संपर्क साधने का प्रयास बेहद गंभीर मामला है। ऐसे कदमों को किसी भी हालत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।उन्होंने इसे न्यायपालिका के इतिहास का "काला दिन" बताते हुए कहा कि न्यायिक संस्थाओं की स्वतंत्रता की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है।

जांच और कार्रवाई पर जोर

मामले को लेकर आगे की प्रक्रिया और जांच पर भी जोर दिया गया है। न्यायपालिका से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने की बात कही गई है।विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायपालिका में विश्वास बनाए रखने के लिए जरूरी है कि न्यायिक प्रक्रिया में किसी भी बाहरी प्रभाव की संभावना को पूरी तरह खत्म किया जाए। अदालतों की स्वतंत्रता लोकतंत्र के मजबूत स्तंभों में से एक है और इसे बनाए रखना बेहद जरूरी है।

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