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गोरखपुर में छात्र की हरकत से मचा हड़कंप, बहन के साथ अनुचित व्यवहार का आरोप; स्कूल में भी सामने आया मामला

यूपी में क्लास-4 के छात्र ने बहन को न्यूड किया:पोर्न देखकर टीचर की डर्टी पिक्चर बनाई

गोरखपुर में बच्चों से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां कक्षा चार में पढ़ने वाले एक छात्र पर अपनी सात वर्षीय बहन के साथ अनुचित व्यवहार करने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि छात्र ने मोबाइल पर अश्लील सामग्री देखने के बाद अपनी बहन के साथ भी वैसा ही व्यवहार करने की कोशिश की। इसी दौरान उसकी मां कमरे में पहुंच गईं और घटना देखकर हैरान रह गईं।

मामला सामने आने के बाद परिवार में हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि घटना के बाद परिजनों ने बच्चे से बातचीत की और मामले को समझने की कोशिश की। चूंकि दोनों बच्चे नाबालिग हैं, इसलिए उनकी पहचान और घटना से जुड़ी संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

इस मामले का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि छात्र ने स्कूल में भी एक महिला शिक्षक की आपत्तिजनक तस्वीर बनाकर दिखाई थी। इस घटना के बाद स्कूल प्रबंधन ने मामले को गंभीरता से लिया और छात्र के परिजनों को इसकी जानकारी दी। प्रिंसिपल ने बच्चे के व्यवहार को लेकर परिवार से बात की और स्थिति पर ध्यान देने की सलाह दी।

परिजनों के सामने घर में हुई घटना के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि इतनी कम उम्र के बच्चे तक अश्लील सामग्री कैसे पहुंची। विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों के हाथ में मोबाइल और इंटरनेट की आसान पहुंच होने के कारण वे कई बार ऐसी सामग्री के संपर्क में आ सकते हैं, जिसे उनकी उम्र के लिहाज से समझना या देखना उचित नहीं होता। इससे उनके व्यवहार और मानसिक विकास पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

ऐसे मामलों में बच्चे को केवल दोषी मानकर दंडित करने के बजाय उसके व्यवहार के पीछे की वजह समझना भी जरूरी माना जाता है। अभिभावकों को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने, मोबाइल के इस्तेमाल की निगरानी करने और उन्हें उम्र के अनुरूप इंटरनेट सुरक्षा के बारे में समझाने की जरूरत होती है।

स्कूलों की भूमिका भी ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि किसी बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई देता है या वह अन्य बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार करता है, तो शिक्षकों और अभिभावकों को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। जरूरत पड़ने पर बाल मनोवैज्ञानिक या प्रशिक्षित काउंसलर की मदद ली जा सकती है।

गोरखपुर के इस मामले ने कम उम्र के बच्चों के बीच इंटरनेट और अश्लील सामग्री की पहुंच को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर अभिभावकों से बच्चों के मोबाइल और इंटरनेट इस्तेमाल पर नजर रखने की अपील की जा रही है। साथ ही बच्चों को सुरक्षित और असुरक्षित व्यवहार के बीच अंतर समझाना भी जरूरी है।

चूंकि मामला नाबालिग बच्चों से जुड़ा है, इसलिए उनकी निजता और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। मामले में आगे की कार्रवाई और तथ्यों की पुष्टि संबंधित अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन की जांच के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।

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