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STF के दरोगा ने रिश्वत में मांगी गाय-भैंस और कुत्ता, कुर्सी-मेज के लिए भी मांगे 35 हजार रुपये

STF के दरोगा ने रिश्वत में मांगी गाय-भैंस और कुत्ता, कुर्सी-मेज के लिए भी मांगे 35 हजार रुपये

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के एक दरोगा पर रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगा है। आरोप है कि दरोगा ने एक व्यक्ति से मुकदमे में नाम निकलवाने के बदले गाय, भैंस और कुत्ते की मांग की। इसके अलावा कुर्सी-मेज खरीदने के नाम पर भी 35 हजार रुपये देने को कहा। मामले से जुड़े आरोप सामने आने के बाद पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

बताया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति मुकदमे में अपना नाम हटवाना चाहता था। इसी दौरान कथित तौर पर दरोगा ने उससे रिश्वत की मांग की। आरोपों के मुताबिक, रिश्वत केवल नकद रकम तक सीमित नहीं थी, बल्कि पशुओं और कुत्ते की मांग भी की गई थी।

मुकदमे से नाम हटाने के बदले रिश्वत का आरोप

आरोप है कि दरोगा ने व्यक्ति को मुकदमे से नाम निकलवाने का भरोसा दिया और इसके बदले गाय-भैंस तथा कुत्ता देने को कहा। सरकारी कार्रवाई में राहत दिलाने के नाम पर इस तरह की मांग किए जाने का आरोप मामले को गंभीर बनाता है।

हालांकि, मुकदमे से किसी व्यक्ति का नाम हटाने की प्रक्रिया जांच और कानूनी प्रावधानों के तहत होती है। किसी पुलिसकर्मी द्वारा निजी लाभ के बदले ऐसी राहत दिलाने का वादा किए जाने का आरोप जांच का विषय है।

कुर्सी-मेज के लिए भी मांगे 35 हजार रुपये

इस मामले में सबसे चर्चित आरोप कुर्सी-मेज खरीदने के नाम पर 35 हजार रुपये मांगने का है। आरोपों के अनुसार, दरोगा ने पशुओं और कुत्ते की मांग के साथ फर्नीचर के लिए भी रकम मांगी।

यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह सरकारी पद का कथित दुरुपयोग और रिश्वतखोरी से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट होना जरूरी है कि शिकायत किस अधिकारी या एजेंसी के पास पहुंची और उसके आधार पर क्या कार्रवाई की गई।

जांच और कार्रवाई पर नजर

मामले में दरोगा का पक्ष, शिकायत की आधिकारिक स्थिति और विभागीय कार्रवाई से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की पुष्टि हो सकेगी। रिश्वत मांगने के आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय की जा सके।

भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में शिकायतकर्ता के बयान, उपलब्ध साक्ष्य और संबंधित अधिकारियों की जांच महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि रिश्वत मांगने के पर्याप्त प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

फिलहाल प्रयागराज का यह मामला कथित रिश्वत मांगने के असामान्य आरोपों को लेकर चर्चा में है। दरोगा के खिलाफ कार्रवाई हुई है या नहीं, इसकी पुष्टि आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद ही की जानी चाहिए।

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