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सोनम वांगचुक ने PM मोदी को याद दिलाया 2014 का वादा, बोले- 12 साल बीते, अब अगले एक साल में कर सकते हैं पूरा

सोनम वांगचुक ने PM मोदी को याद दिलाया 2014 का वादा, बोले- 12 साल बीते, अब अगले एक साल में कर सकते हैं पूरा

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके 2014 के एक कथित वादे की याद दिलाई है। वांगचुक ने कहा कि प्रधानमंत्री ने करीब 12 साल पहले एक इंटरव्यू के दौरान जो बात कही थी, वह अब तक पूरी नहीं हुई है। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि यदि वे चाहें तो अगले एक साल में इस वादे को पूरा किया जा सकता है।

सोनम वांगचुक ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में किए गए वादे को अब काफी लंबा समय बीत चुका है। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री के उस बयान को करीब 12 साल हो चुके हैं, लेकिन जिस लक्ष्य की बात उस समय की गई थी, उस दिशा में अभी भी काम पूरा होना बाकी है।

वांगचुक ने कहा कि देश में बड़े बदलाव लाने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस पुराने वादे को पूरा करने की दिशा में कदम उठाने का आग्रह किया। उनका कहना है कि अगर सरकार इस मुद्दे को प्राथमिकता दे तो अगले एक साल के भीतर इसे पूरा किया जा सकता है।

स्वतंत्रता दिवस पर उठाया मुद्दा

सोनम वांगचुक ने स्वतंत्रता दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि देश को किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने इंटरव्यू का हवाला देते हुए अपनी बात रखी और कहा कि जनता से किए गए वादों की समय-समय पर समीक्षा भी जरूरी है।

वांगचुक लंबे समय से पर्यावरण और हिमालयी क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। विशेष रूप से लद्दाख से जुड़े मामलों को लेकर उन्होंने कई बार सरकार के सामने अपनी मांगें रखी हैं। उनके आंदोलनों और बयानों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा होती रही है।

अगले एक साल में पूरा करने की अपील

वांगचुक ने अपने संदेश में प्रधानमंत्री को यह भी संकेत दिया कि अभी बहुत देर नहीं हुई है। उनका कहना है कि यदि प्रधानमंत्री इस दिशा में इच्छाशक्ति दिखाएं तो अगले एक साल में 2014 के उस वादे को पूरा किया जा सकता है।

हालांकि, वांगचुक ने जिस 2014 के इंटरव्यू और वादे का उल्लेख किया है, उसके संदर्भ में राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा आगे और तेज हो सकती है। इस मुद्दे पर केंद्र सरकार या प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

स्वतंत्रता दिवस पर सामने आए वांगचुक के इस बयान ने एक बार फिर पुराने चुनावी और राजनीतिक वादों को लेकर बहस छेड़ दी है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया देती है या नहीं।

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