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दुश्मनों को फंसाने के लिए बेटे ने ही मां को मार डाला, 26 महीने बाद खुला रामबेटी हत्याकांड का राज

दुश्मनों को फंसाने के लिए बेटे ने ही मां को मार डाला, 26 महीने बाद खुला रामबेटी हत्याकांड का राज

उत्तर प्रदेश के बरेली में 26 महीने पुराने रामबेटी हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। भमोरा थाना क्षेत्र के कुड्डा गांव में 6 अगस्त 2024 को हुई 55 वर्षीय रामबेटी की हत्या के मामले में पुलिस ने उनके बेटे महेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, महेंद्र ने अपनी मां की हत्या इसलिए की, ताकि परिवार के अपने विरोधियों को इस मामले में फंसाया जा सके। लंबे समय तक हत्या का आरोप पड़ोस और रिश्तेदारी के लोगों पर लगता रहा, लेकिन जांच आगे बढ़ने के बाद पूरी कहानी ही बदल गई।

घर के बाहर सो रही थीं रामबेटी

पुलिस के अनुसार, 6 अगस्त 2024 की रात रामबेटी घर के बाहर पेड़ के नीचे तख्त पर सो रही थीं। इसी दौरान उनके सिर पर किसी भारी वस्तु से हमला किया गया, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना के बाद उनके बेटे गजेंद्र की ओर से परिवार के ही नत्थू सिंह, सर्वेश, सुरेंद्र, वीरेंद्र और छोटेलाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। जांच के दौरान वीरेश उर्फ बाबा का नाम भी मामले में जोड़ा गया था।

पुलिस करीब एक साल तक मामले की जांच करती रही, लेकिन नामजद आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत नहीं मिले। इसके बाद एसएसपी अनुराग आर्य ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की। जांच की जिम्मेदारी कैंट इंस्पेक्टर संजय धीर को दी गई। एसआईटी ने पहले नामजद आरोपियों की गतिविधियों और घटना के समय उनकी मौजूदगी की पड़ताल की।

पॉलीग्राफ टेस्ट में आरोपियों की भूमिका नहीं मिली

जांच के दौरान नामजद आरोपियों का दिल्ली स्थित सीबीआई लैब में पॉलीग्राफ टेस्ट कराया गया। पुलिस के मुताबिक, जांच में इन लोगों की हत्या में संलिप्तता के पर्याप्त संकेत नहीं मिले। इसके बाद पुलिस ने दूसरे एंगल से जांच शुरू की और परिवार के सदस्यों की भूमिका भी खंगाली। इसी दौरान महेंद्र पर पुलिस का शक गहराने लगा।

रिपोर्ट के अनुसार, महेंद्र ने पॉलीग्राफ टेस्ट कराने से इनकार किया था। पुलिस ने उसके बयानों, घटना के समय उसकी मौजूदगी और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को मिलाकर जांच आगे बढ़ाई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रामबेटी के पेट में अधपचा भोजन मिलने की बात भी सामने आई। विशेषज्ञों की राय के आधार पर पुलिस ने भोजन और हत्या के बीच के समय का मिलान किया, जिससे जांच की दिशा महेंद्र की ओर और मजबूत हुई।

राशन की दुकान को लेकर चल रही थी रंजिश

जांच में पुलिस को पता चला कि महेंद्र और उसके तहेरे भाइयों के बीच राशन की दुकान के कोटे को लेकर विवाद चल रहा था। पुलिस के मुताबिक, इसी पारिवारिक रंजिश में महेंद्र ने कथित तौर पर विरोधियों को फंसाने की योजना बनाई। पुलिस का कहना है कि उसने अपनी मां की हत्या के बाद ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की, जिससे शक उसके विरोधियों पर जाए।

पुलिस के मुताबिक, घटना वाली रात रामबेटी को महेंद्र अपने साथ गांव के बाहर बने घर ले गया था। बाद में उसने अपने बच्चों और पत्नी को दूसरे घर भेज दिया। इसके बाद हत्या की गई। सुबह महेंद्र ने पुलिस को हत्या की सूचना दी। अलग-अलग फोन नंबरों से पुलिस को सूचना दिए जाने की भी जांच की गई और इन नंबरों के इस्तेमाल को महेंद्र से जोड़ा गया।

26 महीने बाद गिरफ्तार हुआ बेटा

एसआईटी की जांच में मिले मौखिक, भौतिक, चिकित्सकीय और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने 30 सितंबर को महेंद्र को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पुलिस के अनुसार उसने मां की हत्या करने की बात स्वीकार की। इसके बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

इस तरह 26 महीने तक उलझी रही रामबेटी हत्याकांड की जांच में नया मोड़ आया। जिन लोगों पर शुरुआत में हत्या का आरोप लगा था, उनकी भूमिका की जांच के बाद पुलिस ने उन्हें मामले से अलग किया और अब मृतका के बेटे महेंद्र को आरोपी बनाया गया है। पुलिस आगे मामले से जुड़े अन्य साक्ष्यों और घटनाक्रम की भी जांच कर रही है।

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