"कोई मेरे बेटे को बचा लो..." लखनऊ अग्निकांड में मां की चीखों ने सबको रुलाया, आग की लपटों में घिरा था युवक
अलीगंज के पुरनिया इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। हादसे के दौरान सामने आए कुछ दृश्य इतने दर्दनाक थे कि उन्हें देखकर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। आग की लपटों और धुएं के बीच अपने बेटे को बचाने के लिए एक मां की गुहार ने पूरे माहौल को गमगीन कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब इमारत में आग तेजी से फैल रही थी, तब अंदर फंसे लोगों में अफरा-तफरी मच गई। इसी दौरान एक युवक आग और धुएं की चपेट में आ गया। बाहर खड़ी उसकी मां लगातार चिल्लाती रही, "कोई मेरे बेटे को बचा लो... कोई उसे बाहर निकालो..." लेकिन हालात इतने भयावह थे कि तुरंत मदद पहुंचाना मुश्किल हो गया।
चीख-पुकार से दहल उठा इलाका
हादसे के समय इमारत के आसपास लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई थी। आग की ऊंची लपटें और धुएं का गुबार दूर तक दिखाई दे रहा था। अंदर फंसे लोगों को बचाने के लिए स्थानीय लोग भी अपने स्तर पर प्रयास कर रहे थे।
मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि मां की चीखें सुनकर हर कोई भावुक हो गया था, लेकिन आग की भयावहता के कारण कोई भी इमारत के अंदर नहीं जा पा रहा था।
राहत-बचाव दल ने चलाया अभियान
घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग, पुलिस और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंच गए। कई घंटों तक चले अभियान के बाद आग पर काबू पाया गया और अंदर फंसे लोगों को बाहर निकाला गया।
हालांकि, हादसे में कई लोगों की जान चली गई और अनेक लोग घायल हो गए। घायलों को तत्काल अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
अग्निकांड के बाद अस्पतालों और घटना स्थल पर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। कई लोग अपने प्रियजनों की तलाश में भटकते नजर आए। किसी का बेटा, किसी की बेटी तो किसी का भाई इस हादसे का शिकार हो गया।
मां की अपने बेटे को बचाने की मार्मिक पुकार इस त्रासदी का सबसे दर्दनाक दृश्य बनकर सामने आई, जिसने वहां मौजूद लोगों को झकझोर दिया।
जांच जारी, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
प्रशासन ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। आग लगने के कारणों और सुरक्षा मानकों में किसी प्रकार की लापरवाही की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सार्वजनिक भवनों और संस्थानों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, मृतकों और घायलों के परिवारों के लिए यह हादसा जीवनभर का दर्द बन गया है।

