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चित्रकूट के 1000 से ज्यादा गांवों में बदलाव लाएंगे समाजशिल्पी दंपती, DRI कर रहा भर्ती; 5 साल गांव में रहकर करना होगा काम

चित्रकूट के 1000 से ज्यादा गांवों में बदलाव लाएंगे समाजशिल्पी दंपती, DRI कर रहा भर्ती; 5 साल गांव में रहकर करना होगा काम

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित चित्रकूट क्षेत्र के 1000 से अधिक गांवों में सामाजिक बदलाव लाने के लिए दीनदयाल शोध संस्थान (DRI) ने समाजशिल्पी दंपतियों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू की है। चयनित पति-पत्नी को पांच साल तक गांव में रहकर ग्रामीणों के साथ मिलकर विकास कार्य करने होंगे। उनका मुख्य उद्देश्य गांवों को गरीबी, बेरोजगारी, बीमारी और अशिक्षा से मुक्त बनाने की दिशा में काम करना होगा।

संस्थान ऐसे दंपतियों की तलाश कर रहा है, जो शहर की सुविधाओं को छोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में रहकर समाज सेवा के लिए समय दे सकें। इन दंपतियों को गांवों में केवल योजनाओं की जानकारी देने तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि ग्रामीणों को अपने विकास के लिए खुद आगे आने और सामूहिक प्रयास करने के लिए प्रेरित करना होगा।

पांच साल तक गांव में रहकर करना होगा काम

समाजशिल्पी दंपती योजना के तहत चयनित पति-पत्नी को पांच साल तक गांव में रहना होगा। वे ग्रामीणों के साथ मिलकर गांव की समस्याओं को समझेंगे और उनके समाधान के लिए काम करेंगे। गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाना, खेती को बेहतर बनाना, शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना तथा स्वच्छता को बढ़ावा देना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल होगा।

इसके अलावा गांवों को हरा-भरा, विवादमुक्त और आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर दिया जाएगा। संस्थान का मानना है कि जब ग्रामीण खुद अपनी समस्याओं को पहचानकर उनके समाधान में भागीदारी करेंगे, तभी स्थायी सामाजिक बदलाव संभव होगा।

पांच गांवों के समूह पर काम करने की व्यवस्था

DRI की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, समाजशिल्पी दंपती ग्रामीण विकास के लिए उत्प्रेरक की भूमिका निभाते हैं। एक दंपती को सामान्य तौर पर पांच गांवों के समूह के साथ काम करने की जिम्मेदारी दी जाती है। वे गांव के परिवारों, स्थानीय समितियों और ग्रामीण संगठनों के साथ मिलकर विकास की गतिविधियों को आगे बढ़ाते हैं।

इस काम में परिवारों की आमदनी बढ़ाने, बेरोजगारी कम करने, कृषि तकनीकों में सुधार, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता जैसे विषय शामिल हैं। ग्रामीणों को आपसी विवाद गांव में ही बातचीत से सुलझाने और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए भी प्रेरित किया जाता है।

18 नवंबर को चित्रकूट में होगा इंटरव्यू

समाजशिल्पी दंपती योजना के लिए साक्षात्कार 18 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजे से आयोजित किया जाएगा। यह प्रक्रिया मध्य प्रदेश के सतना जिले के चित्रकूट स्थित आरोग्यधाम परिसर में होगी। अभ्यर्थियों को आवेदन और अपने मूल शैक्षणिक दस्तावेजों के साथ निर्धारित समय पर पहुंचना होगा।

महानगर स्तंभ - उत्तर, राज्य

नानाजी देशमुख ने शुरू किया था ग्रामीण विकास का प्रयोग

दीनदयाल शोध संस्थान की स्थापना नानाजी देशमुख ने वर्ष 1968 में की थी। उन्होंने चित्रकूट को अपनी कर्मभूमि बनाकर ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता का मॉडल तैयार करने पर काम किया। समाजशिल्पी दंपती योजना की शुरुआत वर्ष 1996 में की गई थी। इसका उद्देश्य ऐसे समर्पित दंपतियों को गांवों में भेजना था, जो ग्रामीणों के बीच रहकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए लगातार काम कर सकें।संस्थान का मानना है कि गांवों का विकास केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी से संभव है। इसी सोच के तहत समाजशिल्पी दंपती ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने और गांवों में स्थायी विकास की व्यवस्था तैयार करने में सहयोग करते हैं।

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