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यूपी में छह एयरपोर्ट बंद, अरबों के निवेश पर उठे सवाल; कुशीनगर समेत कई हवाई अड्डों से उड़ानें ठप

यूपी में छह एयरपोर्ट बंद, अरबों के निवेश पर उठे सवाल; कुशीनगर समेत कई हवाई अड्डों से उड़ानें ठप

उत्तर प्रदेश में हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए बनाए गए कई एयरपोर्ट अब चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। प्रदेश में कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट समेत छह हवाई अड्डों से उड़ानें बंद हो गई हैं। इन एयरपोर्ट के निर्माण में अरबों रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन यात्रियों की कमी और परिचालन संबंधी समस्याओं के कारण इनका संचालन प्रभावित हुआ है।

वहीं, प्रदेश के सबसे बड़े जेवर एयरपोर्ट और गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट से भी उड़ानों की संख्या कम होने की बात सामने आ रही है। इससे राज्य में एयर कनेक्टिविटी और निवेश को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर थमी उड़ानें

कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं के साथ विकसित किया गया था। इसका उद्देश्य पूर्वांचल के लोगों को बेहतर हवाई सुविधा देना और पर्यटन को बढ़ावा देना था।

हालांकि, पर्याप्त संख्या में उड़ानें नहीं मिलने के कारण यहां से हवाई सेवाएं प्रभावित हुईं। लंबे समय से यहां नियमित उड़ानों का संचालन नहीं हो पा रहा है।

छह एयरपोर्ट हुए प्रभावित

रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के कई छोटे और क्षेत्रीय एयरपोर्ट से उड़ान सेवाएं बंद हो चुकी हैं। इन एयरपोर्ट के निर्माण पर बड़ी धनराशि खर्च की गई थी, लेकिन यात्रियों की संख्या और एयरलाइंस की रुचि कम होने के कारण संचालन में मुश्किलें आ रही हैं।

सरकार ने इन एयरपोर्ट को क्षेत्रीय विकास और लोगों को सस्ती हवाई यात्रा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया था।

जेवर और हिंडन से भी कम हो रहीं उड़ानें

प्रदेश में बड़े एयरपोर्ट के रूप में विकसित किए जा रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) को लेकर भी तैयारियां तेज हैं। हालांकि, मौजूदा समय में गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट और अन्य हवाई अड्डों से उड़ानों की संख्या में कमी की खबरें सामने आई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि एयरपोर्ट की सफलता के लिए केवल निर्माण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित उड़ानें, यात्रियों की मांग और एयरलाइंस का संचालन भी जरूरी होता है।

सरकार के सामने बड़ी चुनौती

हवाई अड्डों पर हुए बड़े निवेश के बाद अब उन्हें पूरी क्षमता से संचालित करना सरकार और विमानन कंपनियों के लिए चुनौती बन गया है। अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुविधा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए नए विकल्पों पर काम किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ते हवाई नेटवर्क के बीच बंद पड़े और कम उड़ानों वाले एयरपोर्ट को दोबारा सक्रिय करना आने वाले समय में महत्वपूर्ण मुद्दा रहेगा।

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