4 सितंबर को ही मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: गृहस्थ और वैष्णव संप्रदाय का व्रत-पूजन एक ही दिन, 5 सितंबर को लेकर असमंजस खत्म
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर इस बार तारीख को लेकर बना असमंजस अब खत्म हो गया है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर, शुक्रवार को ही मनाई जाएगी। गृहस्थ और वैष्णव संप्रदाय दोनों के लिए जन्माष्टमी का व्रत और भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव इसी दिन होगा।
पंचांग और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की स्मृति में मनाई जाती है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं और रात 12 बजे भगवान के जन्म के समय विशेष पूजा-अर्चना और आरती करते हैं।
गृहस्थ और वैष्णव दोनों का व्रत 4 सितंबर को
इस बार खास बात यह है कि गृहस्थ और वैष्णव संप्रदाय के लिए अलग-अलग तारीख नहीं है। दोनों परंपराओं में 4 सितंबर को ही व्रत रखा जाएगा और रात में जन्मोत्सव मनाया जाएगा।
इसके चलते श्रद्धालुओं के बीच 4 या 5 सितंबर को जन्माष्टमी मनाने को लेकर जो भ्रम बना हुआ था, वह अब दूर हो गया है।
रात 12 बजे होगा कान्हा का जन्म
जन्माष्टमी के दिन मंदिरों में विशेष सजावट की जाएगी। भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का श्रृंगार किया जाएगा। श्रद्धालु दिनभर व्रत और पूजा-अर्चना के बाद रात 12 बजे भगवान के जन्म के समय आरती करेंगे।
जन्म के समय मंदिरों में शंख-घड़ियाल बजेंगे और भक्त 'नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की' के जयकारों के साथ जन्मोत्सव मनाएंगे।
मंदिरों में विशेष आयोजन
जन्माष्टमी को लेकर देशभर के कृष्ण मंदिरों में तैयारियां चल रही हैं। मंदिरों में फूल बंगले सजाए जा रहे हैं और आकर्षक विद्युत सज्जा की जा रही है। कई स्थानों पर भजन-कीर्तन, झांकियां और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
श्रद्धालुओं के लिए जन्माष्टमी का दिन विशेष धार्मिक महत्व रखता है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर मंदिरों में देर रात तक भक्तों की भीड़ रहने की संभावना है।

