उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर परियोजना को लेकर बिजली विभाग की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतों और नियामकीय निर्देशों के पालन में कथित लापरवाही को लेकर Uttar Pradesh Electricity Regulatory Commission ने Uttar Pradesh Power Corporation Limited पर 7.18 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
यह कार्रवाई आयोग की सुनवाई के बाद की गई। मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष Arvind Kumar और सदस्य Sanjay Kumar Singh की पीठ ने की।
स्मार्ट मीटर बना विवाद का विषय
प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने की योजना शुरू होने के बाद से ही कई उपभोक्ताओं ने अधिक बिल आने, रीडिंग में गड़बड़ी और तकनीकी समस्याओं की शिकायतें दर्ज कराई हैं। इन शिकायतों को लेकर बिजली विभाग और उपभोक्ताओं के बीच लंबे समय से विवाद बना हुआ है।
नियामक आयोग के समक्ष भी इस संबंध में कई मामले पहुंचे थे, जिन पर सुनवाई के बाद यह कार्रवाई की गई।
आयोग ने दिखाई सख्ती
UPERC ने माना कि कुछ मामलों में निर्देशों के अनुपालन और शिकायतों के निस्तारण में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई। इसी आधार पर UPPCL पर आर्थिक दंड लगाया गया है।
आयोग का उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना और बिजली कंपनियों को जवाबदेह बनाना बताया जा रहा है।
उपभोक्ताओं को मिल सकता है लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग की इस कार्रवाई के बाद बिजली विभाग को स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतों के समाधान में अधिक पारदर्शिता और तत्परता दिखानी होगी। इससे उपभोक्ताओं की समस्याओं के निस्तारण की प्रक्रिया बेहतर हो सकती है।
स्मार्ट मीटर परियोजना पर उठ रहे सवाल
प्रदेश में करोड़ों रुपये की लागत से स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, लेकिन लगातार मिल रही शिकायतों के कारण यह परियोजना विवादों में बनी हुई है। कई उपभोक्ता संगठन भी स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली और बिलिंग प्रक्रिया पर सवाल उठा चुके हैं।
आगे भी जारी रहेगी निगरानी
आयोग ने संकेत दिए हैं कि उपभोक्ता हितों से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भविष्य में भी बिजली कंपनियों के कामकाज और शिकायत निस्तारण प्रणाली पर नजर रखी जाएगी।
UPPCL पर लगाया गया यह जुर्माना बिजली क्षेत्र में जवाबदेही और उपभोक्ता अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे स्मार्ट मीटर परियोजना के संचालन और निगरानी पर भी नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है।

