पहलगाम आतंकी हमले की बरसी पर कश्मीर में कड़ी सुरक्षा, टूरिस्ट स्थलों पर हाई अलर्ट
पहलगाम आतंकी हमले को आज एक साल पूरा हो गया है। इस मौके पर जम्मू-कश्मीर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने घाटी में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया है। विशेष रूप से पर्यटकों की आवाजाही वाले प्रमुख स्थलों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी किया गया है।
सूत्रों के अनुसार, पहलगाम, गुलमर्ग, सोनमर्ग और श्रीनगर के आसपास के सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा जांच को और मजबूत किया गया है। प्रवेश और निकास बिंदुओं पर सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके। सुरक्षाबलों की अतिरिक्त टुकड़ियां संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त कर रही हैं।
इस बार प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को तकनीक से भी जोड़ा है। घाटी में काम करने वाले सभी पोनी ऑपरेटरों, लोकल गाइड्स और अन्य टूरिस्ट सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए QR कोड आधारित विशेष सत्यापन प्रणाली लागू की गई है। इस सिस्टम के तहत हर व्यक्ति की पहचान डिजिटल रूप से दर्ज की जा रही है, जिससे उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सके और फर्जी या संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान आसान हो सके।
प्रशासन का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य पर्यटन को सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। QR कोड स्कैनिंग के जरिए सुरक्षा एजेंसियां तुरंत संबंधित व्यक्ति की जानकारी प्राप्त कर सकती हैं, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तेजी से कार्रवाई संभव हो सकेगी।
स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त नाके लगाए गए हैं और सादे कपड़ों में भी सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए भी निगरानी को मजबूत किया गया है।
पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि सुरक्षा बढ़ने से पर्यटकों में भरोसा बढ़ेगा, हालांकि कुछ जगहों पर सख्ती के कारण शुरुआती तौर पर थोड़ी असुविधा भी देखी जा सकती है। इसके बावजूद, प्रशासन का मानना है कि सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी प्रकार की चूक को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इधर, घाटी में स्थानीय लोगों ने भी शांति और सुरक्षा बनाए रखने की अपील की है। कई सामाजिक संगठनों ने कहा है कि कश्मीर में पर्यटन अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इसे सुरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है।
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में कश्मीर में पर्यटन गतिविधियों में बढ़ोतरी हुई है, और बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पहले से अधिक सतर्क दिखाई दे रही हैं।
एक साल पहले हुए हमले की बरसी को देखते हुए प्रशासन ने साफ किया है कि किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और घाटी में शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

