संघ के शताब्दी वर्ष समापन पर 200 शाखाओं का संगम, प्रांत प्रचारक बोले- शाखा व्यक्ति को मेंढक नहीं, सिंह की तरह बलिष्ठ बनाती है
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के समापन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में करीब 200 शाखाओं का संगम हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने भाग लिया। इस दौरान संघ की शाखाओं की भूमिका, अनुशासन, संगठन और व्यक्तित्व निर्माण पर विचार रखे गए। प्रांत प्रचारक ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि शाखा व्यक्ति को कमजोर नहीं, बल्कि सिंह की तरह बलिष्ठ बनाती है।
उन्होंने कहा कि संघ की शाखा केवल शारीरिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास, संगठन की भावना और समाज के प्रति जिम्मेदारी विकसित करने का माध्यम है। नियमित शाखा में आने से व्यक्ति के भीतर सामूहिक रूप से काम करने और चुनौतियों का सामना करने की क्षमता बढ़ती है।
200 शाखाओं के स्वयंसेवक हुए शामिल
शताब्दी वर्ष के समापन पर आयोजित शाखा संगम में लगभग 200 शाखाओं के स्वयंसेवकों की भागीदारी रही। कार्यक्रम को संगठनात्मक एकजुटता और संघ की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा गया। इस दौरान स्वयंसेवकों ने एक साथ भाग लेकर शाखा आधारित गतिविधियों और संगठन की कार्यपद्धति का परिचय दिया।
कार्यक्रम में संघ के विचारों, सामाजिक दायित्वों और स्वयंसेवकों की भूमिका पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि संगठन की मजबूती उसके कार्यकर्ताओं के अनुशासन, समर्पण और निरंतर सक्रियता पर निर्भर करती है।
शाखा से व्यक्तित्व निर्माण पर जोर
प्रांत प्रचारक ने अपने संबोधन में शाखा के महत्व को समझाते हुए कहा कि शाखा में व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनने की प्रेरणा मिलती है। यहां नियमित गतिविधियों के जरिए समय पालन, सामूहिकता और नेतृत्व जैसे गुण विकसित किए जाते हैं।
उन्होंने शाखा की तुलना ऐसी व्यवस्था से की, जो व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार करती है। उनके अनुसार, शाखा में मिलने वाला प्रशिक्षण स्वयंसेवकों को समाज के बीच सक्रिय रहने और जरूरत के समय जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देता है।
शताब्दी वर्ष में संगठनात्मक गतिविधियों पर चर्चा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में संगठन से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इन कार्यक्रमों के जरिए संघ की शाखाओं, सामाजिक कार्यों और स्वयंसेवकों की भागीदारी पर जोर दिया जाता है।
शाखा संगम जैसे आयोजन अलग-अलग शाखाओं से जुड़े स्वयंसेवकों को एक मंच पर लाने का अवसर देते हैं। इससे आपसी समन्वय बढ़ाने और संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने में मदद मिलती है।
कार्यक्रम में प्रांत प्रचारक का संदेश शाखा के माध्यम से अनुशासन, शारीरिक मजबूती और व्यक्तित्व विकास पर केंद्रित रहा। हालांकि, कार्यक्रम का स्थान, आयोजन की तारीख और उपस्थित प्रमुख पदाधिकारियों के नाम की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

