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संभल में शादियों को लेकर पंचायत के 6 अनोखे फरमान, बारात लेट होने पर 5 हजार प्रति घंटा जुर्माना

संभल में शादियों को लेकर पंचायत के 6 अनोखे फरमान, बारात लेट होने पर 5 हजार प्रति घंटा जुर्माना

उत्तर प्रदेश के संभल जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक पंचायत द्वारा शादियों को लेकर छह अनोखे फरमान जारी किए गए हैं, जिनकी चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है।

सबसे ज्यादा चर्चा उस निर्णय को लेकर है, जिसमें कहा गया है कि यदि बारात तय समय से देरी से पहुंचेगी तो दूल्हा पक्ष पर प्रति घंटे 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। पंचायत का तर्क है कि बारात के देर से पहुंचने के कारण लड़की पक्ष को आर्थिक और सामाजिक असुविधा का सामना करना पड़ता है, इसलिए समय की पाबंदी सुनिश्चित करने के लिए यह नियम बनाया गया है।

इसके अलावा पंचायत ने यह भी फरमान जारी किया है कि रिश्ता तय होने के समय दूल्हा और दुल्हन के बीच मोबाइल नंबर का आदान-प्रदान नहीं किया जाएगा। यानी सगाई के बाद भी दोनों के बीच सीधे मोबाइल संपर्क पर रोक रहेगी। पंचायत का मानना है कि इससे पारिवारिक मर्यादा बनी रहेगी और अनावश्यक विवादों से बचाव होगा।

स्थानीय लोगों के अनुसार, पंचायत ने शादियों में फिजूलखर्ची और अनावश्यक तामझाम को रोकने के लिए भी कुछ अन्य निर्देश जारी किए हैं। हालांकि इन सभी छह फरमानों की आधिकारिक लिखित प्रति अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन गांव और आसपास के इलाकों में इन्हें लागू करने की चर्चा तेज है।

इन फैसलों को लेकर समाज में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे सामाजिक अनुशासन और परंपराओं की रक्षा के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं, तो वहीं कुछ लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता में दखल मान रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पंचायतें सामाजिक दिशा-निर्देश दे सकती हैं, लेकिन कोई भी निर्णय संविधान और कानून के दायरे से बाहर नहीं होना चाहिए।

प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि सूत्रों के अनुसार, यदि किसी फरमान से किसी व्यक्ति के अधिकारों का हनन होता है तो संबंधित पक्ष प्रशासन से शिकायत कर सकता है।

संभल की इस पंचायत के फैसलों ने एक बार फिर पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और आधुनिक व्यक्तिगत अधिकारों के बीच चल रही बहस को तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि ये फरमान व्यवहार में कितने प्रभावी होते हैं और प्रशासन इस पर क्या रुख अपनाता है।

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