ताजनगरी की सड़कों पर नियम बेबस, नाम-पहचान की जगह रसूख दिखा रहीं गाड़ियों की नंबर प्लेट
ताजनगरी की सड़कों पर ट्रैफिक नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। दोपहिया हो या चारपहिया वाहन, अब गाड़ियों की नंबर प्लेट पहचान का साधन नहीं, बल्कि रसूख, दबदबा और जातीय पहचान के प्रदर्शन का जरिया बनती जा रही हैं। शहर की सड़कों पर फर्राटा भरती गाड़ियों पर कहीं “पापा”, तो कहीं “यादव”, “नवाब” और “राम” जैसे शब्द लिखे नजर आ रहे हैं।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह सब कुछ चौराहों पर तैनात ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ विभाग की मौजूदगी में हो रहा है। प्रमुख चौराहों, व्यस्त बाजारों और हाईवे पर खुलेआम नियमों का उल्लंघन करने वाली ये गाड़ियां बेखौफ दौड़ रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी या तो इन्हें देख नहीं पा रहे या जानबूझकर अनजान बने हुए हैं।
मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार, हर वाहन पर मानक प्रारूप में जारी नंबर प्लेट होना अनिवार्य है। इसके अलावा किसी भी प्रकार का नाम, उपनाम, जाति या उपाधि लिखवाना कानूनन अपराध है। इसके बावजूद शहर में सैकड़ों वाहन ऐसे नजर आ जाते हैं, जिनकी नंबर प्लेट या तो पूरी तरह गायब है या फिर डिजाइनर स्टाइल में नामों से सजी हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी नंबर प्लेट लगवाने वालों में अधिकतर युवा और रसूखदार वर्ग शामिल है। कुछ लोग इसे शान समझते हैं, तो कुछ इसे अपनी पहचान और दबदबे का प्रतीक मानते हैं। इससे सड़क पर न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि सामाजिक तनाव की आशंका भी बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नाम या जाति लिखी नंबर प्लेटें किसी दुर्घटना या अपराध की स्थिति में वाहन की पहचान में बड़ी बाधा बनती हैं। कई मामलों में सीसीटीवी फुटेज होने के बावजूद पुलिस वाहन का पता नहीं लगा पाती, क्योंकि नंबर प्लेट स्पष्ट नहीं होती।
ट्रैफिक नियमों का पालन करने वाले आम नागरिकों में इसको लेकर भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि छोटी-सी गलती पर आम लोगों का चालान काट दिया जाता है, जबकि खुलेआम नियम तोड़ने वाले रसूखदार लोग बेधड़क घूमते रहते हैं। इससे कानून के दोहरे मापदंड लागू होने का संदेश जाता है।
आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी इस मुद्दे पर औपचारिक बयान जरूर देते हैं कि जल्द अभियान चलाया जाएगा, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। अगर वास्तव में सख्ती बरती जाए, तो शहर में एक ही दिन में सैकड़ों चालान किए जा सकते हैं।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि नंबर प्लेट से जुड़े नियमों की अनदेखी सिर्फ दिखावे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कानून व्यवस्था और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने मांग की है कि बिना किसी भेदभाव के ऐसे वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाए।
कुल मिलाकर, ताजनगरी की सड़कों पर यह स्थिति प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो कानून का डर खत्म होता चला जाएगा और सड़कों पर अराजकता और बढ़ सकती है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी कब अपनी आंखें खोलते हैं और नियमों को वास्तव में लागू करते हैं।

