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वित्त वर्ष 2026-27 में उत्तर प्रदेश में प्राथमिकता क्षेत्र के लिए 9.13 लाख करोड़ रुपये का ऋण संभावित

वित्त वर्ष 2026-27 में उत्तर प्रदेश में प्राथमिकता क्षेत्र के लिए 9.13 लाख करोड़ रुपये का ऋण संभावित

नाबार्ड (राष्ट्रीय ग्रामीण विकास बैंक) की स्टेट फोकस रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में उत्तर प्रदेश में प्राथमिकता क्षेत्र के तहत 9.13 लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऋण संभावित है। यह ऋण राज्य में कृषि, ग्रामीण उद्योग और अन्य प्राथमिकता क्षेत्रों के विकास को गति देने के उद्देश्य से उपलब्ध कराया जाएगा।

रिपोर्ट के अनुसार, इस ऋण में करीब 34 प्रतिशत यानी 3.12 लाख करोड़ रुपये केवल कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों के लिए निर्धारित किए गए हैं। इसमें किसानों को फसल ऋण, सिंचाई परियोजनाओं, आधुनिक कृषि उपकरण और पशुपालन जैसे विकासात्मक कार्यों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

नाबार्ड के विशेषज्ञों का कहना है कि प्राथमिकता क्षेत्र में यह ऋण न केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके अलावा, ऋण का वितरण समान और पारदर्शी तरीके से किया जाएगा ताकि सभी पात्र लाभार्थियों तक सहायता पहुंचे।

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जारी नाबार्ड रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कृषि क्षेत्र के अलावा ग्रामीण उद्योग, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME), स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी अन्य प्राथमिकता क्षेत्रों को भी पर्याप्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इससे राज्य में रोजगार सृजन, ग्रामीण विकास और आर्थिक समावेशन को बढ़ावा मिलेगा।

विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि नाबार्ड की इस रिपोर्ट में राज्य सरकार और बैंकों को यह संकेत दिया गया है कि ऋण वितरण की प्रक्रिया में डिजिटल निगरानी और सतर्कता बढ़ाई जाए। यह कदम ऋण वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करेगा।

उत्तर प्रदेश में कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए नाबार्ड का यह ऋण कार्यक्रम किसानों, ग्रामीण उद्यमियों और अन्य लाभार्थियों के लिए आर्थिक सहायता का एक मजबूत स्तंभ साबित होगा। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि राज्य सरकार और वित्तीय संस्थान मिलकर कृषि ऋण और प्राथमिकता क्षेत्र के संसाधनों का अधिकतम लाभ सुनिश्चित करें।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह ऋण योजना समय पर और प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो राज्य में कृषि उत्पादन में वृद्धि, ग्रामीण आय में सुधार और रोजगार सृजन के लक्ष्यों को हासिल किया जा सकेगा। साथ ही, यह ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच आर्थिक असमानता को कम करने में भी मदद करेगा।

नाबार्ड की स्टेट फोकस रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि प्राथमिकता क्षेत्र के लिए उपलब्ध 9.13 लाख करोड़ रुपये का ऋण राज्य की समग्र आर्थिक विकास रणनीति में एक महत्वपूर्ण घटक होगा। इससे न केवल कृषि क्षेत्र, बल्कि अन्य विकासात्मक गतिविधियों में भी गति आएगी।

इस प्रकार, उत्तर प्रदेश में वित्त वर्ष 2026-27 में नाबार्ड की रिपोर्ट के अनुसार प्राथमिकता क्षेत्रों के लिए संभावित ऋण कृषि और ग्रामीण विकास को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। राज्य में इस वित्तीय सहायता के माध्यम से किसानों, ग्रामीण उद्यमियों और अन्य लाभार्थियों को सशक्त और समर्थ बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।

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