सोनभद्र के सत्य सनातन ट्रस्ट के खाते में पहुंचे साइबर ठगी के 2.37 करोड़ रुपये, आठ राज्यों में करीब 11 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के पते पर पंजीकृत सत्य सनातन ट्रस्ट का नाम बड़े साइबर ठगी के मामले में सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, आठ राज्यों में करीब 11 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की गई है। इस ठगी से जुड़ी रकम में से 2.37 करोड़ रुपये फरवरी से अक्टूबर के बीच रेणुकूट स्थित ट्रस्ट के बैंक खाते में जमा किए गए। मामले के सामने आने के बाद ट्रस्ट के खाते में पहुंचे पैसों और कथित लेन-देन की जांच को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, साइबर ठगी की रकम अलग-अलग राज्यों से जुड़े लेन-देन के माध्यम से ट्रस्ट के खाते तक पहुंची। फरवरी से अक्टूबर के बीच खाते में जमा हुए 2.37 करोड़ रुपये को करीब 11 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है। जांच में यह पता लगाना अहम होगा कि रकम किन खातों से भेजी गई, किस माध्यम से ट्रांसफर हुई और ट्रस्ट के पदाधिकारियों या खाते का संचालन करने वालों की इसमें क्या भूमिका रही।
साइबर अपराध के मामलों में ठग अक्सर दूसरे लोगों या संस्थाओं के बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी से हासिल रकम को एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए करते हैं। ऐसे खातों को आम तौर पर म्यूल अकाउंट कहा जाता है। इन खातों के जरिए रकम को कई चरणों में ट्रांसफर किया जा सकता है, जिससे मूल ठगों और पैसे के वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है। हालांकि, सत्य सनातन ट्रस्ट के खाते का इस्तेमाल किस तरह हुआ और संबंधित लोगों की भूमिका क्या रही, इसकी पुष्टि जांच के तथ्यों से ही होगी।
इस मामले में जांच के दौरान बैंक खातों के विवरण, लेन-देन की तारीखों, रकम भेजने वाले खाताधारकों और प्राप्तकर्ताओं की जानकारी अहम हो सकती है। साथ ही यह भी पता लगाना होगा कि आठ राज्यों में दर्ज या सामने आए मामलों का आपस में क्या संबंध है और क्या सभी लेन-देन एक ही साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़े हैं।
करीब 11 करोड़ रुपये की कथित साइबर ठगी और ट्रस्ट के खाते में जमा 2.37 करोड़ रुपये की जानकारी इस मामले को गंभीर बनाती है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि अब तक कितने आरोपियों की पहचान हुई है, किसी की गिरफ्तारी हुई है या ट्रस्ट के बैंक खाते को फ्रीज किया गया है।
फिलहाल मामले में ट्रस्ट की भूमिका, रकम के स्रोत और कथित साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क से जुड़े पहलुओं की पुष्टि होना बाकी है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों से ही स्पष्ट हो सकेगा कि खाते में जमा रकम किस उद्देश्य से आई और इस पूरे मामले में किन लोगों की जिम्मेदारी बनती है।

