शुक्रवार सुबह से हो रही बारिश ने दिल्ली-NCR से सटे नोएडा और ग्रेटर नोएडा में मौसम पूरी तरह बदल दिया है। बारिश से तापमान में गिरावट आई है और ठंड बढ़ गई है, लेकिन लोगों को प्रदूषण और खराब एयर क्वालिटी से जो राहत मिलने की उम्मीद थी, वह अभी तक नहीं मिली है। हल्की बारिश के बावजूद हवा पूरी तरह साफ नहीं हुई है, जिससे लोगों में बेचैनी बढ़ रही है।
सुबह से हो रही बूंदाबांदी ने वातावरण में नमी बढ़ा दी है। न्यूनतम तापमान गिरकर करीब 8 से 10 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है, जिससे ठंड बढ़ गई है। लोग गर्म कपड़ों में लिपटे नजर आए। बारिश के कारण सुबह काम पर जाने वाले और अपनी रोजमर्रा की जिंदगी जीने वाले लोगों को ठंड की दोहरी मार झेलनी पड़ी। सड़कों पर फिसलन होने से ट्रैफिक की रफ्तार भी धीमी हो गई।
AQI से राहत की उम्मीदें अधूरी
बारिश शुरू होते ही लोगों को प्रदूषण और स्मॉग से कुछ राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन हल्की बारिश प्रदूषण को पूरी तरह हटाने में बेअसर साबित हुई। नोएडा और ग्रेटर नोएडा के कई इलाकों में एयर क्वालिटी AQI खराब से बहुत खराब कैटेगरी में बना हुआ है।
शुक्रवार सुबह नोएडा में AQI 349 रिकॉर्ड किया गया, जबकि ग्रेटर नोएडा में AQI 339 रिकॉर्ड किया गया। ये आंकड़े बहुत खराब कैटेगरी में आते हैं और सेहत के लिए गंभीर खतरा माने जाते हैं। हवा में PM2.5 और PM10 जैसे ज़हरीले कण लंबे समय तक एटमॉस्फियर में बने रहते हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब बारिश हल्की होती है और हवा की स्पीड कम होती है, तो पल्यूशन के कण हवा में जमने के बजाय फंसे रहते हैं। यही वजह है कि बारिश के बाद भी हवा धुंधली रहती है और स्मॉग की स्थिति बनी रहती है। सुबह कई इलाकों में हल्का कोहरा और पल्यूशन का लेवल देखा गया, जिससे विज़िबिलिटी पर असर पड़ा।
सेहत पर सीधा असर
बारिश, ठंड और पल्यूशन का यह दोहरा असर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी मेडिकल कंडीशन वाले लोगों पर सबसे ज़्यादा पड़ रहा है। हॉस्पिटल और क्लीनिक में खांसी, जुकाम, गले में खराश और सांस की दिक्कतों के मामले बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ठंड के मौसम में शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है, और अगर उसी समय पॉल्यूशन लेवल ज्यादा हो, तो बीमारी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
ऐसे में खास सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बच्चों और बुजुर्गों को बेवजह बाहर निकलने से बचना चाहिए। सांस की बीमारियों से जूझ रहे लोगों को मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए। ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़े पहनने चाहिए और ठंडी हवा के सीधे संपर्क में आने से बचना चाहिए। सुबह और शाम की सैर को अभी टालना ही बेहतर है।
आगे कैसा रहेगा मौसम?
मौसम विभाग के मुताबिक, आने वाले दिनों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना है। तापमान और गिर सकता है, जिससे ठंड और बढ़ेगी। हालांकि, जब तक तेज हवाएं या भारी बारिश नहीं होती, पॉल्यूशन से पूरी तरह राहत मिलने की उम्मीद कम है।
कुल मिलाकर, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में छिटपुट बारिश से मौसम ठंडा हो गया है, लेकिन पॉल्यूशन की समस्या बनी हुई है। ठंड और खराब AQI ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। इसलिए, लोगों के लिए अलर्ट रहना, सेहत का ध्यान रखना और मौसम में अगले बदलाव का इंतज़ार करना ज़रूरी है।
मौसम वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र कुमार SG का कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में छिटपुट बारिश की उम्मीद है। हालांकि, आने वाले दिनों में मौसम साफ़ रहने की भी उम्मीद है। दिल्ली-NCR और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में, खासकर सुबह और देर रात हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है।
नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, बागपत, मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, फरीदाबाद, दिल्ली और गुरुग्राम में भारी बारिश की संभावना कम है, लेकिन हल्की बूंदाबांदी और बादल छाए रह सकते हैं। इस दौरान तापमान में तेज़ गिरावट और ठंडी हवाएं चलने से ठंड और बढ़ सकती है।
अधिकारियों के मुताबिक, हवा की रफ़्तार अभी बहुत कम है। जब तक तेज़ हवाएं या लगातार भारी बारिश नहीं होती, तब तक प्रदूषण के कण वायुमंडल में फंसे रहेंगे। यही वजह है कि AQI में उम्मीद के मुताबिक सुधार देखने को नहीं मिला है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, जैसे-जैसे पश्चिमी हवाओं में नमी एक्टिव होगी, वायुमंडल में नमी बढ़ेगी। इस नमी की वजह से टेम्परेचर तेज़ी से गिरता है, ठंडी हवाएँ चलती हैं और मौसम में भारी बदलाव आता है।
साइंटिस्ट्स का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से मौसम सूखा था, लेकिन पश्चिमी हवाओं के आने से बादल छा गए और हल्की बारिश शुरू हो गई। यही वजह है कि लोगों को अचानक ठंड लगने लगी। मौसम विभाग के मुताबिक, इस समय हवा की स्पीड बहुत कम है। जब हवाएँ बहुत तेज़ नहीं होती हैं, तो प्रदूषण के कण हवा में फंसे रहते हैं। यही वजह है कि बारिश के बावजूद हवा साफ़ नहीं हुई और AQI में कोई खास सुधार नहीं हुआ। साइंटिस्ट्स ने यह भी कहा कि सर्दियों में ऐसे बदलाव नॉर्मल हैं।

