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राहुल गांधी मानहानि केस में बरी, सुल्तानपुर कोर्ट ने 8 साल पुराने मामले में सुनाया फैसला; अमित शाह पर टिप्पणी से जुड़ा था विवाद

राहुल गांधी मानहानि केस में बरी, सुल्तानपुर कोर्ट ने 8 साल पुराने मामले में सुनाया फैसला; अमित शाह पर टिप्पणी से जुड़ा था विवाद

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की MP/MLA कोर्ट ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को मानहानि के मामले में बरी कर दिया। यह मामला वर्ष 2018 में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष और वर्तमान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर की गई कथित टिप्पणी से जुड़ा था। करीब आठ साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने राहुल गांधी को दोषमुक्त कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला मई 2018 का है। उस समय कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान बेंगलुरु में राहुल गांधी की ओर से अमित शाह को लेकर कथित टिप्पणी किए जाने का आरोप लगा था। भाजपा नेता विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को सुल्तानपुर में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी।शिकायतकर्ता का आरोप था कि राहुल गांधी की टिप्पणी से अमित शाह की छवि को नुकसान पहुंचा। इसके बाद मामला अदालत में पहुंचा और लंबे समय तक कानूनी कार्यवाही चलती रही।

पहले तलब किया, फिर मिली जमानत

मामले में अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए तलब किया था। इसके बाद वह फरवरी 2024 में अदालत में पेश हुए और उन्हें जमानत मिल गई। राहुल गांधी ने आरोपों को खारिज करते हुए शिकायत को राजनीति से प्रेरित बताया था।इस मामले में शिकायतकर्ता की ओर से राहुल गांधी की आवाज के नमूने की तुलना कराने की मांग भी की गई थी। हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया था। इसके बाद मामले से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ती रही।

अदालत ने क्यों किया बरी?

26 अक्टूबर को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा की अदालत ने फैसला सुनाते हुए राहुल गांधी को बरी कर दिया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने शिकायतकर्ता विजय मिश्रा को इस मामले में मानहानि की शिकायत करने के लिए कानूनी रूप से प्रभावित व्यक्ति नहीं माना। अदालत ने यह भी पाया कि राहुल गांधी की कथित टिप्पणी से शिकायतकर्ता की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने का पर्याप्त आधार साबित नहीं हुआ।

आठ साल बाद कानूनी प्रक्रिया का अहम पड़ाव

फैसले के बाद राहुल गांधी को इस मामले में राहत मिली। हालांकि, शिकायतकर्ता के वकील ने फैसले की प्रति का अध्ययन करने के बाद आगे अपील करने की संभावना जताई है। ऐसे में आगे की कानूनी स्थिति अदालत के आदेश और संभावित अपील पर निर्भर करेगी।इस फैसले के साथ 2018 में शुरू हुआ मानहानि का मामला निचली अदालत में राहुल गांधी के बरी होने के साथ एक अहम पड़ाव पर पहुंच गया है।

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