कैनरा बैंक के 4.62 करोड़ रुपये के बकाया ऋण के सिलसिले में अलीगढ़ की नदीम तरीन एजुकेशनल सोसाइटी की संपत्ति को सरफेसी अधिनियम के तहत नीलाम किया गया। इस कार्रवाई के तहत सोसाइटी की दोदपुर स्थित प्रमुख संपत्ति को मीट कारोबारी हाजी जहीर कुरैशी ने खरीदा।
बैंक अधिकारियों ने बताया कि सोसाइटी पर कुल 11 करोड़ रुपये का ऋण था, जिसमें से 4.62 करोड़ रुपये बकाया थे। बकाया राशि वसूल करने और ऋण डिफॉल्टर पर कार्रवाई करने के लिए बैंक ने कानूनी प्रक्रिया अपनाई। इसके तहत संपत्ति की नीलामी कर उसे खरीदार को बेच दिया गया।
नीलामी के दौरान संपत्ति में कई दस्तावेज और कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं। अधिकारियों ने बताया कि नीलामी में हाजी जहीर कुरैशी ने सबसे अधिक बोली लगाई और संपत्ति उन्हें आवंटित की गई। हालांकि, खरीदार को भौतिक कब्जा अभी मिलना बाकी है। बैंक और संबंधित अधिकारी कब्जा हस्तांतरित करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक ऋण की वसूली के लिए सरफेसी अधिनियम के तहत इस तरह की कार्रवाई कानूनी रूप से सक्षम और प्रभावी है। इससे न केवल बैंक को बकाया राशि वसूल करने में मदद मिलती है, बल्कि ऋण लेने वाले संस्थाओं और व्यक्तियों के लिए भी जिम्मेदारी का संदेश जाता है।
सोसाइटी के प्रतिनिधियों ने इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें नीलामी के निर्णय की जानकारी मिल गई थी। उन्होंने कहा कि संपत्ति नीलामी के बाद अब बैंक और खरीदार के बीच कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है।
हाजी जहीर कुरैशी ने भी कहा कि उन्होंने संपत्ति नीलामी में खरीदी है और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही भौतिक कब्जा प्राप्त करेंगे। उन्होंने बताया कि संपत्ति का व्यावसायिक उपयोग और रखरखाव कानूनी अनुमति के बाद ही किया जाएगा।
अलीगढ़ जिले में इस तरह की नीलामी यह दर्शाती है कि बैंक और वित्तीय संस्थाएं ऋण वसूली के लिए सख्त कदम उठा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे कदमों से अन्य ऋण लेने वाले संस्थाओं और व्यक्तियों में अनुशासन बढ़ता है और वित्तीय प्रणाली मजबूत होती है।
नीलामी की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संपन्न कराई गई। बैंक अधिकारियों ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे मामलों में भी कानूनी ढांचे का पालन कर संपत्ति वसूली की जाएगी।
इस कार्रवाई से यह संदेश गया है कि ऋण लेने वाले संस्थाओं और व्यक्तियों को अपने वित्तीय दायित्वों का पालन करना चाहिए। अन्यथा बैंक और वित्तीय संस्थाएं कानूनी उपायों के तहत कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगी।

