उत्तर प्रदेश में बिजली संकट: 10 उत्पादन इकाइयां तकनीकी खराबी से बंद, 5340 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित; कोयले की कमी ने बढ़ाई मुश्किल
उत्तर प्रदेश में पिछले करीब एक सप्ताह से जारी बिजली संकट के बीच अब इसकी बड़ी वजहें सामने आने लगी हैं। प्रदेश की 10 बिजली उत्पादन इकाइयों के तकनीकी कारणों से बंद होने के चलते करीब 5340 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। दूसरी ओर, कोयला खदानों में भारी बारिश और जलभराव के कारण कोयले की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। उत्पादन में कमी और कोयले की सप्लाई बाधित होने से प्रदेश के कई हिस्सों में बिजली संकट गहराता जा रहा है।
बताया जा रहा है कि बिजली उत्पादन करने वाली कई इकाइयां तकनीकी खराबी के कारण बंद हैं। इन इकाइयों से होने वाला उत्पादन रुकने का सीधा असर प्रदेश की कुल बिजली उपलब्धता पर पड़ा है। करीब 5340 मेगावाट उत्पादन प्रभावित होने से बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ गया है।
बारिश ने भी बिजली संकट को और गंभीर कर दिया है। कई कोयला खदानों में भारी बारिश के कारण जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है। इसका असर खनन और कोयले की ढुलाई पर पड़ा है। बिजली संयंत्रों तक पर्याप्त मात्रा में कोयला नहीं पहुंचने की वजह से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका और बढ़ गई है।
उत्तर प्रदेश में इस समय बिजली की मांग अधिक बनी हुई है। ऐसे में उत्पादन इकाइयों के बंद होने और कोयले की आपूर्ति में बाधा के कारण बिजली प्रबंधन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। कई क्षेत्रों में बिजली कटौती और आपूर्ति प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
इस संकट के बीच अब बिजली प्रबंधन की तैयारियों और प्लानिंग पर भी सवाल उठने लगे हैं। जानकारों का कहना है कि बारिश और कोयले की आपूर्ति में संभावित बाधा जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पहले से वैकल्पिक व्यवस्था तैयार रखना जरूरी था। साथ ही बंद उत्पादन इकाइयों को जल्द से जल्द चालू करना भी बिजली संकट कम करने के लिए अहम होगा।
बिजली विभाग के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती मांग और उपलब्धता के बीच संतुलन बनाने की है। तकनीकी कारणों से बंद इकाइयों की मरम्मत और कोयले की आपूर्ति सामान्य होने के बाद ही स्थिति में सुधार की उम्मीद है।
वहीं, उपभोक्ताओं को भी बिजली संकट के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बिजली कटौती से घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ कारोबार और छोटे उद्योग भी प्रभावित हो रहे हैं।
फिलहाल बिजली विभाग की नजर बंद उत्पादन इकाइयों को दोबारा शुरू करने और कोयले की आपूर्ति सामान्य कराने पर है। आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति और बिजली संयंत्रों की उपलब्धता यह तय करेगी कि प्रदेश में बिजली संकट कितनी जल्दी दूर होता है।

