प्रयागराज में ठंड के साथ बढ़ा प्रदूषण, AQI 310 तक पहुंचा; स्मॉग की चादर में लिपटा शहर
प्रयागराज में ठंड की दस्तक के साथ वायु प्रदूषण बढ़ने लगा है। मंगलवार को शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 300 के पार पहुंच गया, जबकि नगर निगम क्षेत्र में यह 310 तक दर्ज किया गया। इसके साथ ही हवा की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई। सुबह से ही शहर के कई इलाकों में धुंध और स्मॉग छाया रहा। धूप निकलने के बावजूद आसमान धुंधला दिखाई दिया और दृश्यता भी प्रभावित रही।
सुबह से छाया रहा स्मॉग
मंगलवार सुबह शहर के लोगों को धुंधली हवा का सामना करना पड़ा। सड़कों और खुले स्थानों पर वातावरण साफ नजर नहीं आया। दिन चढ़ने के साथ धूप निकली, लेकिन इसके बावजूद धुंध का असर बना रहा। प्रदूषण बढ़ने से लोगों को सांस लेने में परेशानी होने की आशंका बढ़ गई है।
ठंड के मौसम में हवा की गति कम होने और वातावरण में प्रदूषक कणों के जमा होने से प्रदूषण की समस्या गंभीर हो सकती है। हालांकि, प्रयागराज में मंगलवार को AQI बढ़ने के पीछे किन कारकों की कितनी भूमिका रही, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
AQI 310 का क्या मतलब है?
वायु गुणवत्ता सूचकांक हवा में मौजूद प्रदूषकों के स्तर के आधार पर उसकी गुणवत्ता बताता है। भारत में 301 से 400 के बीच AQI को ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे स्तर पर लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से स्वस्थ लोगों को भी सांस लेने में परेशानी हो सकती है। पहले से सांस या हृदय संबंधी बीमारी से जूझ रहे लोगों पर इसका अधिक असर पड़ सकता है।
नगर निगम क्षेत्र में AQI 310 दर्ज होने का मतलब है कि हवा की गुणवत्ता स्वास्थ्य के लिहाज से चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है। हालांकि, अलग-अलग निगरानी केंद्रों पर प्रदूषण का स्तर अलग हो सकता है।
बच्चों और बुजुर्गों को सावधानी बरतने की जरूरत
प्रदूषण बढ़ने के दौरान बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बहुत खराब वायु गुणवत्ता के समय खुले में लंबे समय तक व्यायाम करने और भारी शारीरिक गतिविधियों से बचना बेहतर है।
यदि बाहर निकलने पर आंखों में जलन, खांसी, गले में खराश या सांस लेने में परेशानी हो, तो प्रदूषण के संपर्क को कम करना चाहिए। गंभीर या लगातार लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
ठंड बढ़ने के साथ चुनौती बढ़ सकती है
सर्दियों में प्रदूषण नियंत्रण प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों की धूल, कचरा या अन्य सामग्री जलाने से निकलने वाला धुआं और मौसम संबंधी परिस्थितियां वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं।
प्रयागराज में AQI 300 के पार पहुंचने के बाद प्रदूषण के स्रोतों की निगरानी और धूल तथा धुएं पर नियंत्रण के उपाय महत्वपूर्ण हो गए हैं। आने वाले दिनों में हवा की गुणवत्ता में सुधार होगा या प्रदूषण और बढ़ेगा, यह मौसम तथा प्रदूषकों के स्तर पर निर्भर करेगा। फिलहाल शहरवासियों को वायु गुणवत्ता की नियमित जानकारी लेते रहने और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने की जरूरत है।

