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लखनऊ एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान फिर मचा हड़कंप, तेज तिरछी हवाओं से विमान को दोबारा भरनी पड़ी उड़ान

लखनऊ एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान फिर मचा हड़कंप, तेज तिरछी हवाओं से विमान को दोबारा भरनी पड़ी उड़ान

लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (अमौसी एयरपोर्ट) पर लैंडिंग के दौरान एक बार फिर यात्रियों की सांसें थम गईं। तेज तिरछी हवाओं के कारण विमान को रनवे पर उतरने में परेशानी हुई। विमान ने टचडाउन करने की कोशिश की, लेकिन स्थिति को देखते हुए पायलट ने तुरंत फैसला लेते हुए विमान को दोबारा हवा में उठा लिया। इस दौरान विमान के लहराने से यात्रियों में डर का माहौल बन गया और कई यात्री घबरा गए।

जानकारी के मुताबिक, यह घटना लखनऊ एयरपोर्ट पर पिछले दस दिनों में दूसरी बार सामने आई है, जब क्रॉस विंड यानी तिरछी हवाओं की वजह से विमान की लैंडिंग प्रभावित हुई। मौसम की स्थिति को देखते हुए पायलट ने सुरक्षा को प्राथमिकता दी और विमान को गो-अराउंड कराया। गो-अराउंड का मतलब होता है कि विमान लैंडिंग की प्रक्रिया शुरू करने के बाद दोबारा उड़ान भरता है, ताकि सुरक्षित परिस्थितियों में फिर से लैंडिंग की जा सके।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विमान जब रनवे के करीब पहुंचा तो तेज हवा के कारण उसमें हलचल महसूस हुई। टचडाउन के बाद अचानक विमान के दोबारा ऊपर उठने से यात्रियों में घबराहट फैल गई। कुछ यात्री डर के कारण चीखने लगे। हालांकि पायलट की सूझबूझ से स्थिति को संभाल लिया गया और बाद में विमान की सुरक्षित लैंडिंग कराई गई।

एविएशन विशेषज्ञों के अनुसार, क्रॉस विंड के दौरान विमान को नियंत्रित करना पायलटों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हवा की दिशा रनवे की दिशा से अलग होने पर विमान के संतुलन पर असर पड़ता है। ऐसे हालात में पायलट हवा की गति, दिशा और विमान की स्थिति का आकलन करते हुए लैंडिंग का फैसला लेते हैं। यदि उन्हें लगता है कि लैंडिंग पूरी तरह सुरक्षित नहीं है तो वे गो-अराउंड प्रक्रिया अपनाते हैं।

इससे पहले भी लखनऊ एयरपोर्ट पर ऐसी ही स्थिति बन चुकी है, जब तेज हवाओं के कारण विमान को उतरने में परेशानी हुई थी। लगातार दूसरी बार सामने आई इस घटना के बाद यात्रियों में चिंता जरूर बढ़ी है, लेकिन विमान संचालन में सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए पायलटों द्वारा लिए गए फैसले को सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है।

मौसम विभाग के अनुसार, बदलते मौसम में तेज हवाओं और हवा के अचानक रुख बदलने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में एयरपोर्ट प्रशासन और एयरलाइंस कंपनियां मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखती हैं, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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