4 हजार करोड़ के जमीन घोटाले में PCS अफसर बर्खास्त: नोएडा में प्राइवेट कंपनियों को बांटी थी जमीन, 2013 से चल रही कार्रवाई
उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा प्राधिकरण से जुड़े करीब 4 हजार करोड़ रुपये के लीजबैक मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। शासन ने नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन सचिव और PCS अधिकारी हरीश चंद्र को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। उनके खिलाफ आरोप था कि नोएडा प्राधिकरण में सचिव पद पर रहते हुए नियमों को दरकिनार कर जमीन का लीजबैक कराया गया। विभागीय जांच में करीब 3 लाख 81 हजार 527 वर्गमीटर जमीन के नियम विरुद्ध लीजबैक की बात सामने आई थी। इस जमीन की बाजार कीमत करीब 3,800 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
2011 में हुआ था लीजबैक
यह मामला नोएडा प्राधिकरण में वर्ष 2011 के दौरान हुए जमीन लीजबैक से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि शहदरा गांव से सटी और नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के आसपास की जमीन को नियमों के विपरीत लीजबैक किया गया। जांच के दायरे में सेक्टर-140ए, 141, 142 और 143 के आसपास की जमीन भी शामिल थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह जमीन 45 से 75 मीटर चौड़ी सड़कों से लगी हुई थी, जिसके चलते उसकी बाजार कीमत काफी ज्यादा थी। विभागीय जांच में जमीन का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 3,800 करोड़ रुपये बताया गया।
निजी कंपनियों के नाम भी जमीन
जांच में एक अहम बात यह सामने आई कि लीजबैक की गई जमीन सिर्फ संबंधित गांव के लोगों तक सीमित नहीं रही। गांव के गैर-निवासी लोगों के अलावा तीन निजी कंपनियों के नाम भी जमीन लीजबैक किए जाने की बात सामने आई।
इन लोगों और कंपनियों को करीब 175 वर्गमीटर से लेकर 15,340 वर्गमीटर तक के भूखंड लीजबैक किए गए थे। जबकि नियमों के अनुसार लीजबैक की सुविधा संबंधित गांव के किसानों के लिए निर्धारित थी। एक परिवार को अधिकतम 450 वर्गमीटर जमीन लीजबैक किए जाने का प्रावधान बताया गया है।
नियमों को दरकिनार करने का आरोप
हरीश चंद्र पर आरोप था कि उनके कार्यकाल में प्राधिकरण की अर्जित और कब्जा प्राप्त जमीन को नियमों का पालन किए बिना लीजबैक कराया गया। विभागीय जांच में उनकी भूमिका पर सवाल उठाए गए थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने नोएडा प्राधिकरण की तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी रितु माहेश्वरी को जांच की जिम्मेदारी दी थी। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी गई, जिसमें तत्कालीन सचिव हरीश चंद्र की भूमिका का उल्लेख किया गया।
दूसरे अधिकारियों पर भी हुई कार्रवाई
यह मामला लंबे समय से प्रशासनिक जांच और कार्रवाई के दायरे में रहा है। लीजबैक प्रकरण में नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन नायब तहसीलदार मनोज कुमार को पहले ही कार्यमुक्त किया जा चुका है। वहीं तत्कालीन विशेष कार्याधिकारी लैंड अजय श्रीवास्तव और सचिव हरीश चंद्र के खिलाफ निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई थी।
हरीश चंद्र की बर्खास्तगी का आदेश नियुक्ति विभाग की ओर से जारी किया गया। बर्खास्तगी के समय वह खाद्य एवं रसद विभाग में स्थानिक प्रतिनिधि के पद पर कोलकाता में तैनात थे।
इस कार्रवाई के बाद नोएडा प्राधिकरण के जमीन आवंटन और लीजबैक से जुड़े पुराने मामलों में एक बार फिर प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा सामने आया है। सरकार की कार्रवाई विभागीय जांच में सामने आए निष्कर्षों के आधार पर की गई है।

