संतकबीरनगर के प्राथमिक विद्यालय में पेंटिंग भुगतान पर सवाल, पहले हो चुके काम के नाम पर 63 हजार रुपये देने का आरोप
उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले के नावध प्राथमिक विद्यालय में पेंटिंग कार्य के भुगतान को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि विद्यालय में पहले ही कराए जा चुके पेंटिंग कार्य के नाम पर 63 हजार रुपये का भुगतान किया गया। इस मामले में ग्राम प्रधान और सचिव की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
मामले को लेकर भुगतान प्रक्रिया और कार्य की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि जिस पेंटिंग कार्य के लिए सरकारी धनराशि जारी की गई, वह काम पहले ही कराया जा चुका था। ऐसे में यह जांच का विषय है कि भुगतान किस आधार पर किया गया और संबंधित कार्य का सत्यापन किस तरह हुआ।
पहले से कराए गए काम के नाम पर भुगतान का आरोप
नावध प्राथमिक विद्यालय में पेंटिंग कार्य को लेकर सामने आए आरोपों के मुताबिक, पहले से पूरा हो चुके कार्य के नाम पर 63 हजार रुपये का भुगतान किया गया। इस मामले में ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव पर सवाल उठाए गए हैं।
सरकारी योजनाओं और विद्यालयों से जुड़े विकास कार्यों में भुगतान से पहले काम की स्थिति का सत्यापन महत्वपूर्ण होता है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि सरकारी धनराशि का उपयोग निर्धारित कार्य के लिए किया गया है। इस मामले में भी भुगतान से जुड़े अभिलेखों और पेंटिंग कार्य की वास्तविक स्थिति की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति
मामले में यह पता लगाना जरूरी है कि पेंटिंग कार्य कब कराया गया था, भुगतान किस तारीख को हुआ और संबंधित बिल तथा अभिलेखों में क्या विवरण दर्ज है। इन तथ्यों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भुगतान निर्धारित नियमों के अनुसार किया गया या नहीं।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में किसी आधिकारिक जांच के निष्कर्ष, संबंधित अधिकारियों के बयान या ग्राम प्रधान और सचिव का पक्ष सामने नहीं आया है। इसलिए भुगतान में अनियमितता के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
सरकारी धनराशि से कराए जाने वाले विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। नावध प्राथमिक विद्यालय में पेंटिंग भुगतान को लेकर उठे सवालों का जवाब संबंधित दस्तावेजों की जांच और प्रशासनिक पक्ष सामने आने के बाद ही मिल सकेगा।

