सोमवती अमावस्या पर आस्था का सैलाब, पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा कर महिलाओं ने मांगा अखंड सौभाग्य
सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इसी क्रम में जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है तो उसे Somvati Amavasya कहा जाता है। वर्ष 2026 की पहली सोमवती अमावस्या इस बार अधिकमास यानी Purushottam Maas में पड़ने के कारण इसका धार्मिक महत्व और भी अधिक बढ़ गया है।
इस अवसर पर सुबह से ही श्रद्धालुओं, विशेषकर महिलाओं में भारी उत्साह देखने को मिला। व्रत रखकर महिलाओं ने पीपल के वृक्ष की पूजा-अर्चना की और परंपरागत रूप से 108 परिक्रमा कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना की।
पूजा के दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे की मांग में सिंदूर लगाकर सुहाग की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन की स्थिरता के लिए प्रार्थना की। मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर पूरे दिन भक्ति और आस्था का माहौल बना रहा, जहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या पर पीपल वृक्ष की पूजा और व्रत करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। इसी कारण बड़ी संख्या में महिलाएं और श्रद्धालु इस दिन विशेष अनुष्ठानों में शामिल होते हैं।
स्थानीय पंडितों के अनुसार, अधिकमास में पड़ने वाली इस सोमवती अमावस्या को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है और इसका महत्व सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाता है। यही वजह है कि इस बार श्रद्धालुओं की भागीदारी भी अधिक देखने को मिली।
पूरे क्षेत्र में दिनभर धार्मिक उत्सव जैसा माहौल बना रहा और शाम तक मंदिरों में पूजा-अर्चना का सिलसिला जारी रहा।

