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नोएडा सेक्टर-150 हादसा: रेस्क्यू टीम के पास थी सारी तैयारी, लेकिन वक्त पर छोटी रस्सी बनी बड़ी बाधा

नोएडा सेक्टर-150 हादसा: रेस्क्यू टीम के पास थी सारी तैयारी, लेकिन वक्त पर छोटी रस्सी बनी बड़ी बाधा

नोएडा में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले ने प्रशासन और रेस्क्यू व्यवस्थाओं की कमजोरियों को फिर उजागर किया है। घटना के चार दिन बाद जब NDRF, SDRF और गोताखोरों की टीम युवराज की कार को उस 70 फीट गहरे बेसमेंट से बाहर निकालने पहुंची, तो उनके पास पूरी तैयारी थी—लेकिन एक छोटी रस्सी ने उस दिन बड़ी मुश्किल पैदा की थी।

जानकारी के अनुसार, पुलिस की एक जीप में रस्सियों का पूरा बंडल मौजूद था। लेकिन जिस दिन युवराज अपनी जान बचाने के लिए कार की छत पर खड़े होकर 'प्लीज मुझे बचा लो' कहते हुए मदद की गुहार लगा रहे थे, उस समय रेस्क्यू टीम के पास पर्याप्त लंबी रस्सी नहीं थी। यदि उस दिन टीम सही उपकरणों के साथ पहुंचती, तो शायद युवराज आसानी से बाहर आ सकते थे और इस दर्दनाक हादसे से बच सकते थे।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस घटना ने रेस्क्यू और आपदा प्रबंधन में तत्कालीन तैयारियों और संसाधनों की कमी को स्पष्ट रूप से उजागर किया है। आधुनिक आपदा प्रबंधन में हर संभव उपकरण और तकनीकी तैयारी होना चाहिए, खासकर जब खतरनाक स्थान जैसे गहरे बेसमेंट और दलदल जैसी परिस्थितियों से निपटना हो।

मौके पर मौजूद रस्सियों और उपकरणों की कमी ने यह भी दिखाया कि पुलिस, प्रशासन और प्राधिकरण के पास संसाधन तो हैं, लेकिन सही समय पर उनका उपयोग और सही योजना नहीं थी।

कुल मिलाकर, नोएडा हादसा सिर्फ एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि यह आपदा प्रबंधन और रेस्क्यू प्रोटोकॉल की कमजोरियों की भी चेतावनी है। अगर उचित संसाधन और योजना समय पर होती, तो युवराज मेहता की जान बचाई जा सकती थी। यह घटना प्रशासन और रेस्क्यू एजेंसियों के लिए भविष्य में सुधार और तैयारी का सबक साबित होनी चाहिए।

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