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noida थोड़ा सा प्यार बदल देगा सुरक्षाकर्मियों का व्यवहार

आम सुरक्षाकर्मियों के खानपान का पूरा ध्यान रखा जाए। साथ ही आम निवासी भी सुरक्षाकर्मियों से प्यार से बात करें, तो उनके बीच आपसी लगाव बढ़ेगा और किसी भी स्थिति में मारपीट की नौबत नहीं आएगी। विचारों का आदान-प्रदान :  प्रो. सिंह ने बताया कि मानसिक परेशानियों के चलते आम सुरक्षाकर्मियों के मन में कुंठा बैठ जाती है। थाट रिप्लेसिग प्रक्रिया के सहारे इस कमी को बेहद आसानी से दूर किया जा सकता है।

उत्तर प्रदेश न्यूज़ डेस्क!!! प्रो. सिंह ने बताया कि मानसिक परेशानियों के चलते सुरक्षाकर्मियों के मन में कुंठा बैठ जाती है। सूत्रों के अनुसार बताया जा रहा है कि,थाट रिप्लेसिग प्रक्रिया के सहारे इस कमी को बेहद आसानी से दूर किया जा सकता है।बताया जा रहा है कि,पिछले सप्ताह सेक्टर-100 स्थित लोटस बुलेवर्ड सोसायटी के निवासी व  बेटे के साथ बेरहमी से मारपीट व जानलेवा हमला करने के मामले में नौ आरोपितों को अब तक जेल भेजा जा चुका है।  ज्यादातर सुरक्षाकर्मी हैं, जो अपनी छोटी सी नौकरी से पूरे परिवार का खर्च चलाते हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि,मामले को लेकर गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान और मानसिक स्वास्थ्य विभाग के विभागाध्यक्ष आनंद प्रताप सिंह ने बताया कि अगर कुछ उपाय अपनाए जाएं तो सोसायटियों और इमारतों में तैनात सुरक्षाकर्मी का व्यवहार समाज के लिए नजीर बन सकता है। खबरों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि, एक प्रोजेक्ट के तहत प्रो. आनंद ने कुछ दिन पहले मनोवैज्ञानिक जांच के तहत सीआरपीएफ के जवानों के साथ लंबा वक्त गुजारा है। इसके आगे  बताया जा रहा है कि,शार्ट टेंपर की यह है वजह :आनंद ने बताया कि निर्धारित अवधि से ज्यादा ड्यूटी करने से सुरक्षाकर्मी चिड़चिड़े हो जाते हैं और उनका व्यवहार भी सामान्य नहीं रह जाता है।

CRPF के जवानों को भी कभी-कभी निर्धारित घंटों से ज्यादा काम करना पड़ता है, उनका व्यवहार सामान्य बना रहता है।  सुरक्षाकर्मियों के लिए नियमित अंतराल पर मानसिक परेशानियों से निकलने के लिए सेमिनार का आयोजन हो तथा निर्धारित घंटों से ज्यादा काम न लिया जाए तो समस्या से बचा जा सकता है।मीडिया रिपेार्ट के अनुसार ,सुरक्षाकर्मियों के खानपान का पूरा ध्यान रखा जाए। साथ ही आम निवासी भी सुरक्षाकर्मियों से प्यार से बात करें, तो आपसी लगाव बढ़ेगा और किसी भी स्थिति में मारपीट की नौबत नहीं आएगी। विचारों का आदान-प्रदान :

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