यूपी चुनाव से पहले नए मोर्चे, पूर्व CBI निदेशक एम. नागेश्वर राव ने किया चुनाव लड़ने का ऐलान
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सियासी गतिविधियां तेज होती नजर आ रही हैं। चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे नए चेहरों के कारण राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा बढ़ गई है। पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के बाद अब पूर्व सीबीआई निदेशक एम. नागेश्वर राव ने भी चुनावी राजनीति में कदम रखने का ऐलान किया है। वहीं, नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ सार्वजनिक रूप से मोर्चा खोलने वाली रोहिणी घावरी भी एक बार फिर सक्रिय नजर आ रही हैं।
पूर्व सीबीआई निदेशक एम. नागेश्वर राव के चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनके संभावित प्रभाव को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। प्रशासनिक और जांच एजेंसी में लंबे समय तक जिम्मेदारी संभाल चुके राव का राजनीतिक मैदान में उतरना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उनका करियर कानून-व्यवस्था और प्रशासन से जुड़े अहम पदों पर रहा है।
इससे पहले पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के सक्रिय होने से भी चुनावी माहौल में नए चेहरों को लेकर चर्चा शुरू हुई थी। प्रशासनिक सेवा से राजनीति में आने वाले अधिकारियों का अनुभव चुनावी मुद्दों और प्रचार अभियान में अलग तरह की भूमिका निभा सकता है। अब राव के ऐलान के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वे किस विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरते हैं और किस राजनीतिक मंच के साथ आगे बढ़ते हैं।
इसी बीच रोहिणी घावरी भी राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हो गई हैं। वह नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद को लेकर पहले भी सार्वजनिक रूप से अपनी बात रख चुकी हैं। उनके बयानों के चलते सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा हुई थी। अब चुनाव से पहले उनकी सक्रियता ने एक बार फिर लोगों का ध्यान खींचा है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनाव से पहले छोटे-बड़े राजनीतिक समूहों और नए चेहरों की सक्रियता आमतौर पर बढ़ जाती है। नेता और संभावित उम्मीदवार अपने मुद्दों को जनता के बीच ले जाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में प्रशासनिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के राजनीति में आने से चुनावी बहस में नए मुद्दे जुड़ सकते हैं।
एम. नागेश्वर राव का लंबा प्रशासनिक अनुभव भी उनके राजनीतिक सफर का प्रमुख हिस्सा रहेगा। हालांकि, चुनाव में उतरने के बाद उन्हें स्थानीय स्तर के मुद्दों, संगठनात्मक समीकरणों और जनता से सीधे जुड़ने की चुनौती का सामना करना होगा। इसी तरह यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि उनकी राजनीतिक रणनीति क्या होगी और वे किन मुद्दों को प्रमुखता देंगे।
यूपी विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक गतिविधियों ने पहले से ही जोर पकड़ना शुरू कर दिया है। नए चेहरों के सामने आने से आने वाले महीनों में सियासी समीकरणों में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं। पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल, पूर्व सीबीआई निदेशक एम. नागेश्वर राव और रोहिणी घावरी की सक्रियता इसी बदलते राजनीतिक परिदृश्य की ओर इशारा करती है।
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि एम. नागेश्वर राव किस सीट से चुनाव लड़ने का फैसला करते हैं, किस राजनीतिक दल या मंच के साथ आगे बढ़ते हैं और रोहिणी घावरी की सक्रियता आने वाले चुनावी माहौल में किस दिशा में जाती है। चुनाव नजदीक आने के साथ इन नए राजनीतिक मोर्चों की तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।

