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नगर निगम ने बढ़ाया लाइसेंस शुल्क, होटल-रेस्टोरेंट से इलाज तक महंगा होने की आशंका

नगर निगम ने बढ़ाया लाइसेंस शुल्क, होटल-रेस्टोरेंट से इलाज तक महंगा होने की आशंका

नगर निगम ने शहर की करीब 40 लाख आबादी पर महंगाई का एक और बोझ डाल दिया है। मंगलवार को हुई नगर निगम सदन की बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए होटल, रेस्टोरेंट, नर्सिंग होम और पैथोलॉजी समेत 10 तरह के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लाइसेंस शुल्क में तीन गुना तक बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी गई। इस निर्णय के बाद शहर में रहना, खाना और इलाज कराना महंगा होना तय माना जा रहा है।

सदन की बैठक में प्रस्ताव पेश करते हुए नगर निगम अधिकारियों ने कहा कि लंबे समय से लाइसेंस शुल्क में संशोधन नहीं हुआ था। बढ़ती प्रशासनिक लागत और शहरी सुविधाओं के विस्तार को देखते हुए शुल्क में वृद्धि आवश्यक हो गई थी। हालांकि, विपक्षी पार्षदों और व्यापार संगठनों ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया।

नगर निगम के निर्णय के अनुसार होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, नर्सिंग होम, पैथोलॉजी लैब, निजी अस्पताल, मैरिज होम, कोचिंग सेंटर, व्यावसायिक गोदाम और निजी कार्यालय जैसे प्रतिष्ठानों के लाइसेंस शुल्क में भारी इजाफा किया गया है। कुछ श्रेणियों में शुल्क दो गुना, तो कुछ में तीन गुना तक बढ़ाया गया है।

व्यापारियों का कहना है कि इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा। होटल और रेस्टोरेंट संचालकों ने आशंका जताई है कि बढ़े हुए शुल्क की भरपाई के लिए उन्हें खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतें बढ़ानी पड़ेंगी। वहीं नर्सिंग होम और पैथोलॉजी संचालकों का कहना है कि इससे इलाज का खर्च भी बढ़ सकता है।

नगर निगम सदन में विपक्षी पार्षदों ने आरोप लगाया कि जनता से जुड़े इस अहम फैसले पर न तो व्यापारियों से राय ली गई और न ही इसका प्रभाव आंकलन किया गया। उनका कहना था कि पहले से ही महंगाई से जूझ रही जनता पर यह फैसला अतिरिक्त बोझ साबित होगा।

दूसरी ओर, नगर निगम प्रशासन का तर्क है कि लाइसेंस शुल्क बढ़ाने से निगम की आय में वृद्धि होगी, जिससे शहर में साफ-सफाई, सड़क, जल निकासी और प्रकाश व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाओं को बेहतर किया जा सकेगा। अधिकारियों ने दावा किया कि यह शुल्क अभी भी अन्य बड़े शहरों की तुलना में कम है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बढ़ोतरी का असर अप्रत्यक्ष रूप से हर वर्ग पर पड़ता है। होटल, रेस्टोरेंट और स्वास्थ्य सेवाओं की लागत बढ़ने से आम नागरिक की मासिक खर्च संरचना प्रभावित होती है। खासतौर पर मध्यम और निम्न आय वर्ग पर इसका अधिक दबाव पड़ सकता है।

व्यापार संगठनों ने संकेत दिए हैं कि यदि शुल्क वृद्धि पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो वे आंदोलन या कानूनी विकल्प पर भी विचार कर सकते हैं। वहीं, आम नागरिकों में भी इस फैसले को लेकर नाराजगी देखी जा रही है।

कुल मिलाकर, नगर निगम का यह फैसला शहर की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन दोनों को प्रभावित करने वाला माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस बढ़ोतरी पर कोई राहत देता है या विरोध के बावजूद इसे लागू करता है।

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